mehrangarh fort haunted in hindi

मेहरानगढ़ किले का इतिहास | Mehrangarh Fort History

Mehrangarh Fort – मेहरानगढ़ किला भारत के प्राचीनतम किलों में से एक है और भारत के समृद्धशाली अतीत का प्रतीक है। यह किला जोधपुर किलों में सबसे बड़े किलों में से एक है। आज हम इसी मेहरानगढ़ किले के बारेमें जानेंगे।

मेहरानगढ़ किले का इतिहास – Mehrangarh Fort History

मेहरानगढ़ किला राजस्थान के जोधपुर में स्थित है और भारत के विशालतम किलो में इसका समावेश है। इसका निर्माण 1460 में राव जोधा ने किया था, यह किला शहर से 410 फीट की ऊँचाई पर स्थित है और मोटी दीवारों से संलग्नित है। इसकी सीमा के अंदर बहुत सारे पैलेस है जो विशेषतः जटिल नक्काशी और महंगे आँगन के लिये जाने जाते है।

शहर के निचले भाग से ही किले में आने के लिये एक घुमावदार रास्ता भी है। जयपुर के सैनिको द्वारा तोप के गोलों द्वारा किये गये आक्रमण की झलकियाँ आज भी हमें स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। इस किले के बायीं तरफ किरत सिंह सोडा की छत्री है, जो एक सैनिक था और जिसने मेहरानगढ़ किले की रक्षा करते हुए अपनी जान दी थी।

इस किले में कुल सात दरवाजे है, जिनमे जयपाल (अर्थ – जीत) गेट का भी समावेश है, जिसे महाराजा मैन सिंह ने जयपुर और बीकानेर की सेना पर मिली जीत के बाद बनाया था। फत्तेहपाल (अर्थ – जीत) गेट का निर्माण महाराजा अजित सिंह ने मुघलो की हार की याद में बनाया था। किले पर पाए जाने वाले हथेली के निशान आज भी हमें आकर्षित करते है।

मेहरानगढ़ किले का म्यूजियम राजस्थान के बेहतरीन और सबसे प्रसिद्ध म्यूजियम में से एक है। किले के म्यूजियम के एक विभाग में पुराने शाही पालकियो को रखा गया है, जिनमे विस्तृत गुंबददार महाडोल पालकी का भी समावेश है, जिन्हें 1730 में गुजरात के गवर्नर से युद्ध में जीता गया था। यह म्यूजियम हमें राठौर की सेना, पोशाक, चित्र और डेकोरेटेड कमरों की विरासत को भी दर्शाता है।

मेहरानगढ़ किले का इतिहास – Mehrangarh Fort History

राठौड़ वंश के मुख्य राव जोधा को भारत में जोधपुर के निर्माण का श्रेय दिया जाता है। 1459 में उन्होंने जोधपुर (प्राचीन समय में जोधपुर मारवाड़ के नाम से जाना जाता था) की खोज की थी। रणमल के 24 पुत्रो में से वे एक थे और 15 वे राठौड़ शासक बने। सिंहासन के विलय के एक साल बाद, जोधा ने अपनी राजधानी को जोधपुर की सुरक्षित जगह पर स्थापित करने का निर्णय लिया, क्योकि उनके अनुसार हजारो साल पुराना मंडोर किला उनके लिये ज्यादा सुरक्षित नही था।

भरोसेमंद सहायक राव नारा (राव समरा के बेटे) के साथ, मेवाड़ सेना को मंडोर में ही दबा दिया गया। इसी के साथ राव जोधा ने राव नारा को दीवान का शीर्षक भी दिया। राव नारा की सहायता से 1 मई 1459 को किले के आधार की नीव जोधा द्वारा मंडोर के दक्षिण से 9 किलोमीटर दूर चट्टानी पहाड़ी पर रखी गयी। इस पहाड़ी को भौर्चीरिया, पक्षियों के पहाड़ के नाम से जाना जाता था।

लीजेंड के अनुसार, किले ले निर्माण के लिये उन्होंने पहाडियों में मानव निवासियों की जगह को विस्थापित कर दिया था। चीरिया नाथजी नाम के सन्यासी को पक्षियों का भगवान भी कहा जाता था। बाद में चीरिया नाथजी को जब पहाड़ो से चले जाने के लिये जबरदस्ती की गयी तब उन्होंने राव जोधा को शाप देते हुए कहा, “जोधा! हो सकता है कभी तुम्हारे गढ़ में पानी की कमी महसूस होंगी।” राव जोधा सन्यासी के लिए घर बनाकर उन की तुष्टि करने की कोशिश कर रहे थे।

साथ ही सन्यासी के समाधान के लिए उन्होंने किले में गुफा के पास मंदिर भी बनवाए, जिसका उपयोग सन्यासी ध्यान लगाने के लिये करते थे। लेकिन फिर भी उनके शाप का असर आज भी हमें उस क्षेत्र में दिखाई देता है, हर 3 से 4 साल में कभी ना कभी वहाँ पानी की जरुर होती है।

मेहरानगढ़, राजस्थानी भाषा उच्चार के अनुसार, मिहिरगढ़ बदलकर ही बाद में मेहरानगढ़ बन गया, सूर्य देवता ही राठौड़ साम्राज्य के मुख्य देवता थे। किले का निर्माण वास्तविक रूप से 1459 में राव जोधा ने शुरू किया था, जो जोधपुर के निर्माता थे।

जोधपुर में मेवाड़ के जसवंत सिंह (1638-78) के समय के किले आज भी दिखाई देते है। लेकिन मेहरानगढ़ किला शहर के मध्य में बना हुआ है और पहाड़ की ऊँचाई पर 5 किलोमीटर तक फैला हुआ है। इसकी दीवारे 36 मीटर ऊँची और 21 मीटर चौड़ी है, जो राजस्थान के ऐतिहासिक पैलेस और सुंदर किले की रक्षा किये हुए है।

इस किले में कुल सात दरवाजे है। जिनमे से सबसे प्रसिद्ध द्वारो का उल्लेख निचे किया गया है :

• जय पोल (विजय का द्वार), इसका निर्माण महाराजा मान सिंह ने 1806 में जयपुर और बीकानेर पर युद्ध में मिली जीत की ख़ुशी में किया था।

• फ़तेह पोल , इसका निर्माण 1707 में मुगलों पर मिली जीत की ख़ुशी में किया गया।

• डेढ़ कंग्र पोल, जिसे आज भी तोपों से की जाने वाली बमबारी का डर लगा रहता है।

• लोह पोल, यह किले का अंतिम द्वार है जो किले के परिसर के मुख्य भाग में बना हुआ है। इसके बायीं तरफ ही रानियो के हाँथो के निशान है, जिन्होंने 1843 में अपनी पति, महाराजा मान सिंह के अंतिम संस्कार में खुद को कुर्बान कर दिया था।

इस किले के भीतर बहुत से बेहतरीन चित्रित और सजे हुए महल है। जिनमे मोती महल, फूल महल, शीश महल, सिलेह खाना और दौलत खाने का समावेश है। साथ ही किले के म्यूजियम में पालकियो, पोशाको, संगीत वाद्य, शाही पालनो और फर्नीचर को जमा किया हुआ है। किले की दीवारों पर तोपे भी रखी गयी है, जिससे इसकी सुन्दरता को चार चाँद भी लग जाते है।

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14 thoughts on “मेहरानगढ़ किले का इतिहास | Mehrangarh Fort History”

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great story sometime, we need to take interest in history.

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Nice history thanks

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bhut bdiya जानकारी आपका बहुत बहुत धन्यवाद

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very nice post thank you for sharing us

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मेहरानगढ़ का किला | Mehrangarh Fort Haunted Story in Hindi

नेक दिल इंसान जो अपनी इच्छाशक्ति से जिंदा दफन हो गया एक रहस्मयी किले के निर्माण के लिए 

दोस्तों रहस्य की दुनिया  ( Rahasyo ki Duniya ) पर आप सभी का स्वागत है। आज हम आपको रहस्य बने एक किले के बारे में बताने वाले है। जो एक व्यक्ति की कब्र पर बना हुआ है जिसके लिए एक व्यक्ति जिंदा दफन हो गया था। जोधपुर जिले में स्थित है रहस्मयी  मेहरानगढ़ का किला  । राजस्थान के जोधपुर जिले में स्थित मेहरानगढ़ फोर्ट से पूरा पाकिस्तान दिखाई देता है। 

आज हम आपको एक दिलचस्प  रहस्यमयी किले  के बारे में बताने वाले है, तो चलिए शुरू करते है

✦  मेहरानगढ़ फोर्ट फोटो गैलरी ✦

Mehrangarh fort Haunted story in Hindi

भारत में ऐतिहासिक पर्यटन स्थलों की कमी नहीं है। एक व्यक्ति अपनी पूरी जिंदगी में भी इन पर्यटन स्थलों को घूम नहीं सकता। भारत के ऐतिहासिक किले को देखने के लिए आपको कई साल लग जाएंगे। यह किले इतिहास को समेटकर भारत के ऐतिहासिक किलों ने इतिहास को समेट कर रखा है और आज भी इतिहास की गाथा बताते है।

जोधपुर का मेहरानगढ़ फोर्ट  ( mehrangarh fort ) 120 मीटर ऊंचाई वाली पहाड़ी पर बना हुआ है। इस प्रकार  मेहरानगढ़ फोर्ट कुतुबमीनार की ऊंचाई( 73 मीटर ) से भी ज्यादा है। मेहरानगढ़ फोर्ट के परिसर में सती माता का मंदिर भी स्थित है।

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मेहरानगढ़ का किला | Mehrangarh fort in Hindi 

मेहरानगढ़ फोर्ट ( mehrangarh fort ) की दीवारों की परिधि 10 किलोमीटर तक फैली हुई है। इन दीवारों की ऊंचाई 20 फुट से 120 फुट और चौड़ाई 12 फुट से 70 फुट तक है। मेहरानगढ़ फोर्ट परकोटे में दुर्गम रास्तों वाले 7 आरक्षित दुर्ग भी बने हुए है। मेहरानगढ़ महल के अंदर मेहरानगढ़ फोर्ट के अंदर अद्भुत नक्काशीदार दरवाजे,  जालीदार खिड़कियां और कई प्रकार के भव्य महल है। मेहरानगढ़ किले के अंदर बहुत ही बेहतरीन और सजे हुए महल है। जिनमें मोती महल, फूल महल, शीश महल, दौलत खाने, सिलाई खाना मौजूद है। 

मेहरानगढ़ फोर्ट म्यूजियम  ( mehrangarh fort and museum ) में पालकी या पोशाके शाही पालनो संगीत वाद्य और फर्नीचर भी मौजूद है। मेहरानगढ़ का किला जोधपुर  की दीवारों पर आज भी तोपें रखी गई है, जो मेहरानगढ़ फोर्ट  ( mehrangarh fort in hindi ) की सुंदरता कई गुना बढ़ा देती है और मेहरानगढ़ फोर्ट के इतिहास  ( mehrangarh fort history in hindi ) को बताती है। 

जोधपुर शासक राव जोधा ने मेहरानगढ़ किला  की नींव 12 मई 1459 को रखी और महाराज जसवंत सिंह ने 1638 से 1678 मेहरानगढ़ किले का निर्माण पूरा किया अर्थात मेहरानगढ़ किले का इतिहास ( mehrangarh fort history in hindi ) लगभग 500 साल से भी अधिक पुराना है। 

जोधपुर किला  ( मेहरानगढ़ किला ) कुल 7 दरवाजे से बना हुआ है। जिनमें सबसे प्रसिद्ध दरवाजों के बारे में हम आपको बताने वाले है 

➤ जय पोल ( विजय पोल मेहरानगढ़ फोर्ट ) दरवाजे का निर्माण महाराजा मानसिंह ने जयपुर और बीकानेर पर मिली जीत की खुशी में किया था।

➤  फतेह पोल का निर्माण 1707 में मुगलों पर मिली फतेह की खुशी में किया गया था। 

➤  डेढ़ कंग्र पोल  जिससे आज भी तोपें से की जाने वाली बमबारी का डर लगा रहता है। 

➤  लोहा पुल मेहरानगढ़ फोर्ट   किले का आखिरी दरवाजा है जो किले के परिसर के मुख्य भाग में  बना हुआ है। इसके  इसके बायीं दिशा की तरफ ही  रानियों के हाथों के निशान बने हुए है। जिन्होंने 1843 में अपने पति महाराजा मानसिंह के अंतिम संस्कार के समय खुद को कुर्बान कर सती बन गई थी।

संत का भयानक श्राप

बहुत समय पहले राव जोधा नामक  महत्वाकांक्षी  शासक ने जोधपुर में राज्य से पहाड़ी पर मेहरानगढ़ फोर्ट बनाने का फैसला किया। राजा ने पहाड़ी पर रहने वाले लोगों को वहां से हटाकर  अपनी मर्ज़ी को अंजाम देने के लिए(   मेहरानगढ़ फोर्ट की नींव रखने का) आदेश दिया। राजा के सिपाहियों ने पहाड़ी से सभी लोगों को हटा दिया।

राजा पहाड़ी पर एक वृद्ध संत बाबा भी रहता था जिसे लोग चिड़ियावाले बाबा के नाम से जानते थे। राजा के सिपाहियों ने उस वृद्ध संत बाबा को भी वह से हटा दिया जिसके बाद संत बाबा ने श्राप दिया कि उसके राज्य में बार-बार सूखा पड़ेगा।

संत ने दिखाया एकमात्र रास्ता 

चिड़ियावाले बाबा के श्राप को सुनकर राजा भयभीत और हैरान हो गए और चिड़िया वाले बाबा के चरणों में  आत्मसमर्पण कर दिया और माफी मांगी। तब अपने श्राप को वापस लेने में असमर्थ बाबा ने श्राप के असर को कम करने के लिए एक समाधान राजा को बताया, की किसी ईमानदार व्यक्ति को अपनी इच्छाशक्ति से दफन होना होगा उसके पश्चात ही  मेहरानगढ़ किले का निर्माण संभव है।

जब राजा प्रजा के बीच रक्षक को खोजने में असफल रहा तो, राजाराम मेघवाल नाम के एक व्यक्ति ने अपने जीवन का बलिदान करने का निश्चय किया और सन 1459 में राजाराम मेघवाल को एक शुभ दिन और शुभ स्थान पर जिंदा दफना दिया गया ताकि मेहरानगढ़ किले की नींव रखी जा सके।

राजाराम मेघवाल का स्मारक

राजाराम मेघवाल के महान बलिदान को ध्यान में रखते हुए राजा ने मेहरानगढ़ किले पर उनकी कब्र बना कर एक बलवा पत्थर पर राजाराम मेघवाल का नाम दफनाने की तारीख और अन्य विवरण को लिखकर लिखवाया था कि आने वाले समय में लोग राजाराम मेघवाल के महान बलिदान के बारे में जान सके।

मेहरानगढ़ किला का इतिहास | Mehrangarh fort history in hindi

मेहरानगढ़ किला का इतिहास  ( mehrangarh fort history in hindi ) कई सालों पुराना ना होकर कई शताब्दियों(सौ वर्ष = एक शताब्दी) पुराना है। शाही परिवार की महिलाएं अक्सर अपने पति के अंतिम संस्कार के समय पति की चिता के साथ जीवित जल कर  या विजय प्रतिद्वंदी द्वारा बेईमानी से बचने के लिए सती हो जाती थी। मेहरानगढ़ किले में लोहा पुल  (लोहे के गेट)  के बाई तरफ पूर्व राजा मान सिंह के जीवन साथी के लगभग 15 या इतने ही भित्ति चित्र अंकित है। जिन्होंने वर्ष 1843 में सती होने का अपराध किया था। मेहरानगढ़ किला का इतिहास

जैसा की किवदंती है कि इस घटना से पूर्व भी सन 1731 राजा अजीत सिंह की पत्नी और मालकिन ने राजा के निधन के बाद सती हुई थी। मेहरानगढ़ किले में देखने के लिए कई प्रकार की चीजें है। जैसे:  चांदी की कलाकृतियां,  लघु चित्र और पेंटिंग, फूल महल और मेहरानगढ़ फोर्ट से दिखने वाले नीले का व्यापक दृश्य फिर भी सूर्य का किला , सती के हाथ के निशान और राजाराम मेघवाल के स्मारक प्रेरकों की आत्मा को प्रभावित करते है।

सती प्रथा भित्ति चित्र

मेहरानगढ़ किले का रहस्य.

mehrangarh kile ka itihas  जोधपुर शहर को लोग सूर्य नगरी के नाम से भी जानते है। सूर्य नगरी में ऐसा बहुत कुछ है जिसको देखने जिसको आंख बार-बार देखना चाहेंगे। लेकिन अगर आप इस शहर के गौरव की बात करें तो  मेहरानगढ़ फोर्ट की सुंदरता के चर्चे देश में ही नहीं विदेश में भी चर्चित है। मेहरानगढ़ किले को जोधपुर शहर की शान कहा गया है । मेहरानगढ़ किले को देखने के लिए भारत के साथ-साथ विदेश से भी लोग आते है। मेहरानगढ़ का किला 120 मीटर की ऊंचाई वाली पहाड़ी पर बनाया गया है। मेहरानगढ़ का किला जोधपुर शहर के हर कोने से देखा जा सकता है। 

1965 में भारत-पाक  लड़ाई के समय सबसे पहले को निशाना बनाया गया था। 

जोधपुर का मेहरानगढ़ किला के एक हिस्से को संग्रहालय म्यूजियम में बदल दिया गया है। जिसे  मेहरानगढ़ म्यूजियम कहते है। मेहरानगढ़ म्यूजियम में शाही पालकियों एक बड़ा कलेक्शन है। इस म्यूजियम में चौदह कमरे है। जो शाही हथियारों, गहनों और वेशभूषा से सजे है। इसके अलावा मोती महल, शीश महल, फूल महल, झांकी महल चार कमरे भी है। 

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किले से दिखाई देता है पाकिस्तान

मेहरानगढ़ किले के बारे में बताया जाता है कि साल 1965 के भारत पाकिस्तान युद्ध में मेहरानगढ़ किले को निशाना बनाया गया था लेकिन माना जाता है कि माता की कृपा से यहां किसी का बाल भी बांका नहीं हुआ मेहरानगढ़ किले की चोटी से पाकिस्तान की सीमा दिखाई देती है ।

इस गैलरी भारतीय इतिहास के मुगल शासन काल के सबसे महत्वपूर्ण और संरक्षित कलेक्शन में से एक है।  राठौड़ राज वंश के शासकों ने मुगल शासकों के साथ घनिष्ठ संबंध बना रखे थे। इनमें कुछ अवशेष मुगल सम्राट अकबर के भी मौजूद है। 

इस गैलरी में जोधपुर के शासकों के सभी सालों के  कवचों के दुर्लभ संग्रह मौजूद है। प्रदर्शनी में तलवार की जेड चांदी, हाथी दांत, राइनो सींग, रतन जड़ित कवच, पन्ना-मोती और बंदूके (जिनकी नालियों पर सोने-चाँदी से काम किया गया है) शामिल है। प्रदर्शनी में राजाओं की व्यक्तिगत तलवारों को भी दिखाया गया है। जैसे राव जोधा कि खांडा के कुछ ऐतिहासिक अवशेष, जिनका वजन लगभग 3 किलोग्राम है। महान मुग़ल सम्राट अकबर की तलवार और तैमूर की तलवार भी इस प्रदर्शनी में मौजूद है।

इस प्रदर्शनी में मारवाड़ और जोधपुर के रंगों को दिखाया गया है जो मारवाड़ के चित्रों का अच्छा उदाहरण है।

पगड़ी गैलरी 

मेहरानगढ़ म्यूजियम की पगड़ी गैलरी में रक्षा दस्तावेज और राजस्थान में प्रचलित  पगड़ीयों के अलग-अलग डिजाइन को दिखाया गया है क्योंकि राजस्थान में हर समुदाय और क्षेत्र और त्योहारों की अपनी अलग अलग पहचान है। 

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मेहरानगढ़ फोर्ट घूमने के लिए बेस्ट समय | Best time to visit Mehrangarh Fort

मेहरानगढ़ फोर्ट घूमने के लिए बेस्ट टाइम अक्टूबर से मार्च है, क्योंकि गर्मी के समय राजस्थान में तापमान बहुत अधिक रहता है। इसलिए राजस्थान घूमने का सबसे बेस्ट टाइम सर्दियों और बरसात है।

मेहरानगढ़ फोर्ट घूमने जाये तब कहां ठहरे

मेहरानगढ़ का किला घूमने के बाद आपके रुकने के लिए यहां पर Hotels, Resort मिल जाएंगे और अगर आपका बजट कम है तो यहां धर्मशालाएं भी मौजूद है जिनमें आप रुकने की व्यवस्था ठहरने और रोकने और खाने की व्यवस्था कर सकते हैं।

मेहरानगढ़ फोर्ट टाइमिंग | mehrangarh fort timings

मेहरानगढ़ का किला सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक खुला रहता है। 

 इसे भी पढ़े   :-  उम्मेद भवन पैलेस जोधपुर

मेहरगढ़ फोर्ट टिकट | mehrangarh fort ticket

मेहरानगढ़ फोर्ट एन्ट्री  सभी के लिए फ्री है। 

Mehrangarh Fort Museum Enrey fees  भारतियों के लिए 100 रूपए, विद्यार्थियों के लिए 50 रूपए है। वही विदेशियों के लिए 600 और विदेशी विद्यार्थियों के लिए 400 भारतीय रूपए है। 

Mehrangarh Fort Images

Mehrangarh Fort Images

मेहरानगढ़ फोर्ट त्यौहार | Mehrangarh fort Festival

  • Rajasthan International Folk Festival in October  
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कैसे पहुंचे मेहरानगढ़ फोर्ट | How to reach Mehrangarh Fort

मेहरानगढ़ किला पहुंचने से पहले आपको जोधपुर पहुंचना होगा। 

फ्लाइट से (By Flight)

आप फ्लाइट से जोधपुर एयरपोर्ट पहुंच सकते है।  जयपुर एयरपोर्ट से टैक्सी द्वारा आप मेहरानगढ़ किला पहुंच सकते है। 

ट्रैन से (By Train)

जोधपुर हर राज्य से ट्रैन से जुड़ा हुआ है। आप ट्रैन से जोधपुर रेलवे स्टेशन पहुंच कर वहा से टैक्सी द्वारा आसानी से मेहरानगढ़ किला( mehrangarh fort jodhpur ) पहुँच जायेगे। 

सड़क से (By Road)

आप जोधपुर बस या अपने पर्सनल गाडी से भी पहुंच सकते है। और परेशानी के mehrangarh fort  घूम सकते है।

नई दिल्ली और आगरा से जयपुर के लिए सीधी बसें मिलते है। दिल्ली और आगरा के बीच का यह सड़क मार्ग गोल्डन ट्रैवल्स क्षेत्र का हिस्सा है।

FaQ : Mehrangarh fort Haunted story in Hindi

यहाँ पर आपको मेहरानगढ़ फोर्ट से सम्बंधित सभी सवालो के जवाब दिए गए है। 

Q:  मेहरानगढ़ का किला कहां स्थित है? मेहरानगढ़ का किला कहां है ? मेहरानगढ़ का किला कहां पर है ?( where is mehrangarh fort located , where is mehrangarh fort )

Ans.   mehrangarh fort जोधपुर जिले में स्थित है। 

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मेहरानगढ़ किले का इतिहास और जानकारी | Mehrangarh Fort History Hindi

Mehrangarh Fort in Hindi/ मेहरानगढ़ किला भारत के राजस्थान में स्थित एक प्राचीन विशालकाय किला हैं जिसे जोधपुर का क़िला (Jodhpur ka Qila) भी कहा जाता है। यह भारत के समृद्धशाली अतीत का प्रतीक है। मेहरानगढ़ किला एक बुलंद पहाड़ी पर 150 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यह शानदार किला राव जोधा द्वारा 1459 ई0 में बनाया गया था। मेहरानगढ़ क़िला पहाड़ी के बिल्‍कुल ऊपर बसे होने के कारण राजस्थान राज्य के सबसे ख़ूबसूरत क़िलों में से एक है।

मेहरानगढ़ किले की जानकारी – Mehrangarh Fort Jodhpur Information in Hindi

राजस्थान में कई और भी ऐतिहासिक इमारतें मौजूद हैं। लेकिन जोधपुर का मेहरानगढ़ किला इनमे सबसे ख़ास है। 400 फीट की ऊंची बिल्कुल सीधी खड़ी चट्टान पर स्थित यह किला भारत के सबसे भव्य और विशाल इमारतों में से एक है। किले से जोधपुर का बेहतरीन नजारा और पाकिस्तान एकदम साफ दिखता है। इस किले के बार में यह भी कहा जाता है कि साल 1965 में भारत और पाकिस्तान के बीच लड़ाई के दौरान सबसे पहले मेहरानगढ़ के किले को टारगेट किया गया था। यह किला दिल्ली के कुतुब मीनार की ऊंचाई (73मीटर) से भी ऊंचा है। इस किले को देखने के लिए साल भर पूरे भारत के साथ-साथ विदेश के लोग आते हैं।

मेहरानगढ़ किला की दीवारें 10 किलोमीटर तक फैली है। इनकी ऊंचाई 20 फुट से 120 फुट तथा चौड़ाई 12 फुट से 70 फुट तक है। इसके परकोटे में किलाम रास्तों वाले सात आरक्षित किला बने हुए थे। घुमावदार सड़कों से जुड़े इस किले के चार दरवाजे हैं। कई हॉलीवुड और बॉलीवुड फिल्मों को किले में शूट किया गया है जिसमें फिल्म द डार्क नाइट राइजेस का नाम भी शामिल है। हॉलीवुड एक्ट्रेस लिज हर्ले ने भी साल 2007 में इसी किले में शादी की थी।

मेहरानगढ़ किले का इतिहास – Mehrangarh Fort Jodhpur History in Hindi

राव जोधा जी को अपने पिता की मृत्यु के बाद मंडोर का राज्य खोना पड़ा तब वे लगातार पंद्रह सालों तक मेवाड़ की फौजों से युद्ध करते रहे और 1453 ई. में उन्होंने मंडोर पर अधिकार किया। जिसके लिए राव जोधा उत्तराधिकारी बने थे। राव जोधा जोधपुर के राजा रणमल की 24 संतानों मे से एक थे। शासन की बागडोर सम्भालने के एक साल बाद राव जोधा को लगने लगा कि मंडोर का किला असुरक्षित है। उन्होने अपने तत्कालीन किले से 9 किलोमीटर दूर एक पहाड़ी पर नया किला बनाने का विचार प्रस्तुत किया। इस पहाड़ी को भोर चिडिया के नाम से जाना जाता है, क्योंकि वहां बहुत से पक्षी रहते थे, राव जोधा ने 12 मई 1459 को इस पहाडी पर किले की नीव डाली महाराज जसवंत सिंह (1638-78) ने इसे पूरा किया।

जब किले के निर्माण से पहले यहां एक साधु रहते थे। वह एक पानी के सोते के पास रहते थे। जब राजा ने उन्हें जाने के लिए कहा, तब शाप देते हुए साधु कहा कि जिस पानी के लिए तुम मुझे हटा रहे हो वह सूख जाएगा। तब से किले के आसपास के इलाके में पानी की लगातार कमी बनी रही थी। राजा के माफी मांगने पर साधु ने एक उपाय बताया। उन्होंने कहा कि शाप को खत्म करने के लिए राज्य के किसी व्यक्ति को अपनी इच्छा से किले के नीचे जिंदा दफन होकर अपने जीवन की बलि देनी पड़ेगी।

जब राजा किसी को ढूंढने में विफल रहे, तब राजाराम मेघवाल नाम के एक व्यक्ति अपने प्राणों की आहुति देने के लिए आगे आए। तब राजाराम मेघवाल को एक शुभ दिन और एक शुभ स्थान पर जिंदा दफनाया गया ताकि मेहरानगढ़ किले की नींव रखी जा सके। राजाराम मेघवाल के बलिदान को श्रद्धांजलि देने के लिए किले में उनकी कब्र के ऊपर बलुआ पत्थर का स्मारक बनाया गया। इस स्मारक में राजाराम का नाम, उनके बलीदान की तारीख और अन्य जानकारियां एक पत्थर पर लिखी गई हैं, ताकि आने वाले समय में उनके बारे में बताया जा सके।

किले में सात दरवाजे हैं, जिन्हें पोल भी कहा जाता है। इनमें से एक जय पोल का निर्माण महाराजा मान सिंह ने 1806 में जयपुर और बीकानेर पर युद्ध में मिली जीत की खुशी में किया था। किले का अंतिम द्वार लोह पोल के बाईं ओर जौहर करने वाली रानियों के हाथों के निशान हैं। यहां 15 से ज्यादा रानियों की हाथों के निशान हैं, जिन्होंने 1843 में अपने पति महाराजा मान सिंह की मौत के बाद जौहर ले लिया था। किंवदंतियों की मानें तो, इस घटना से पहले भी 1731 में महाराजा अजीत सिंह की छह रानियों और 58 पटरानियों ने राजा के निधन के बाद जौहर कर लिया था।

मेहरानगढ़ किले की वास्तुकला – Architecture Of The Fort in Hindi

राव जोधा द्वारा सन 1459 में सामरिक दृष्टि से बनवाया गया यह क़िला प्राचीन कला, वैभव, शक्ति, साहस, त्याग और स्थापत्य का अनूठा नमूना है। यह विशालकाय किला, पथरीली चट्टान पहाड़ी पर, मैदान से 150 मीटर ऊँचाई पर स्थित है और आठ द्वारों व अनगिनत बुर्जों से युक्त दस किलोमीटर लंबी ऊँची दीवार से घिरा है। बाहर से अदृश्य, घुमावदार सड़कों से जुड़े इस किले के चार द्वार हैं। किले के अंदर कई भव्य महल, अद्भुत नक्काशीदार किवाड़, जालीदार खिड़कियाँ और प्रेरित करने वाले नाम हैं। इनमें से उल्लेखनीय हैं मोती महल, फूल महल, शीश महल, सिलेह खाना, दौलत खाना आदि। इन महलों में भारतीय राजवेशों के साज सामान का विस्मयकारी संग्रह निहित है। इसके अतिरिक्त पालकियाँ, हाथियों के हौदे, विभिन्न शैलियों के लघु चित्रों, संगीत वाद्य, पोशाकों व फर्नीचर का आश्चर्यजनक संग्रह भी है। परकोटे की ऊँचाई 20 फुट से 120 फुट तथा चौड़ाई 12 फुट से 70 फुट तक है। परकोटे में दुर्गम मार्गों वाले सात आरक्षित दुर्ग बने हुए थे।

इस किले में कुल सात दरवाजे है, जिनमे जयपाल (अर्थ – जीत) गेट का भी समावेश है, जिसे महाराजा मैन सिंह ने जयपुर और बीकानेर की सेना पर मिली जीत के बाद 1806 ईस्‍वी में बनाया था। फत्तेहपाल (अर्थ – जीत) गेट का निर्माण महाराजा अजित सिंह ने मुगलो पर जीत की याद में बनाया था। किले पर पाए जाने वाले हथेली के निशान आज भी हमें आकर्षित करते है।

दुर्ग के भीतर राजप्रासाद स्थित है। दुर्ग के भीतर सिलहखाना (शस्त्रागार), मोती महल, जवाहरखाना आदि मुख्य इमारतें हैं। क़िले के उत्तर की ओर ऊँची पहाड़ी पर थड़ा नामक एक भवन है जो संगमरमर का बना है। यह एक ऊँचे -चौड़े चबूतरे पर स्थित है।

यहां जोधपुर नरेश जसवंतसिंह सहित कई राजाओं के समाधि स्थल बने हुए हैं। जोधपुर की एक विशेषता यहाँ की कृत्रिम झीलें और कुएँ हैं, जिनके अभाव में इस इलाके में नगर की कल्पना नहीं की जा सकती थी। मेहरानगढ़ के क़िले का एक कुआँ तो 135 मीटर गहरा है। इस सारी व्यवस्था के बावजूद वहाँ जल का अभाव सदैव महसूस किया जाता था। कहा जाता हैं इसके पीछे एक श्राप हैं।

यहां आगंतुक दूसरे गेट पर युद्ध के दौरान तोप के गोलों के द्वारा बनाये गये निशानों को देख सकते हैं। कीरत सिंह सोडा, एक योद्धा जो एम्बर की सेनाओं के खिलाफ किले की रक्षा करते हुये गिर गया था, के सम्मान में यहाँ एक छतरी है। छतरी एक गुंबद के आकार का मंडप है जो राजपूतों की समृद्ध संस्कृति में गर्व और सम्मान व्यक्त करने के लिए बनाया जाता है।

मोती महल, जिसे पर्ल पैलेस के रूप में भी जाना जाता है, किले का सबसे बड़ा कमरा है। यह महल राजा सूर सिंह द्वारा बनवाया गया था, जहां वे अपनी प्रजा से मिलते थे। यहाँ, पर्यटक ‘श्रीनगर चौकी’, जोधपुर के शाही सिंहासन को भी देख सकते हैं। यहाँ पाँच छिपी बाल्कनी हैं जहां से राजा की पाँच रानियाँ अदालत की कार्यवाही सुनती थी।

फूल महल मेहरानगढ़ किले के विशालतम अवधि कमरों में से एक है। यह महल राजा का निजी कक्ष था। इसे फूलों के पैलेस के रूप में भी जाना जाता है, इसमें एक छत है जिसमें सोने की महीन कारीगरी है। महाराजा अभय सिंह ने 18 वीं सदी में इस महल का निर्माण करवाया। माना जाता है कि मुगल योद्धा, सरबुलन्द खान पर राजा की जीत के बाद अहमदाबाद से यह सोना लूटा गया था। शाही चित्र और रागमाला चित्रकला महाराजा जसवंत सिंह द्वितीय के शासनकाल के दौरान महल में लाये गये थे।

शीशा महल सुंदर शीशे के काम से सजा है। आगंतुक शीशा महल में चित्रित धार्मिक आकृतियों के काम को देख सकते हैं। इसे ‘शीशे के हॉल’ के रूप में भी जाना जाता है। एक तखत विला, जिसे तखत सिंह द्वारा बनवाया गया था, भी देखा जा सकता है। ये जोधपुर के अंतिम शासक और मेहरानगढ़ किले का निवासी थे। विला का वास्तुशिल्प पारंपरिक और औपनिवेशिक दोनों शैलियों को प्रदर्शित करता है।

झाँकी महल, जहाँ से शाही महिलायें आंगन में हो रहे सरकारी कार्यवाही को देखती थीं, एक सुंदर महल है। वर्तमान में, यह महल शाही पालनों का एक विशाल संग्रह है। ये पालने, गिल्ट दर्पण और पक्षियों, हाथियों, और परियों की आकृतियों से सजे हैं।

लोह पोल जो की किले का अंतिम द्वार है जो किले के परिसर के मुख्य भाग में बना हुआ है। इसके बायीं तरफ ही रानियो के हाँथो के निशान है, जिन्होंने 1843 में अपनी पति, महाराजा मान सिंह के अंतिम संस्कार में खुद को कुर्बान कर दिया था।

चामुँडा माता – Chamunda Mataji Temple in Hindi

राव जोधा को चामुँडा माता मे अथाह श्रद्धा थी। चामुंडा जोधपुर के शासकों की कुलदेवी होती है। राव जोधा ने 1460 मे मेहरानगढ किले के समीप चामुंडा माता का मंदिर बनवाया और मूर्ति की स्थापना की। मंदिर के द्वार आम जनता के लिए भी खोले गए थे। चामुंडा माँ मात्र शासकों की ही नहीं बल्कि अधिसंख्य जोधपुर निवासियों की कुलदेवी थी और आज भी लाखों लोग इस देवी को पूजते हैं। नवरात्रि के दिनों मे यहाँ विशेष पूजा अर्चना की जाती है।

किला किस पहाड़ी पर बना हुआ है –

इस पहाड़ी को भोर चिडिया के नाम से जाना जाता है, क्योंकि वहां बहुत से पक्षी रहते थे.

जोधपुर का किला किसने बनवाया

यह शानदार किला राव जोधा द्वारा 1459 ई0 में बनाया गया था।

मेहरानगढ़ किले तक कैसे पहुँचे – How To Reach Mehrangarh Fort in Hindi

जोधपुर शहर भारत के सभी प्रमुख शहरों के साथ रेल, सड़क और हवाई नेटवर्क से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है, इसलिए यहां जाने में कोई परेशानी नहीं होगी। यहां का निकटतम रेलवे स्टेशन ‘राय का बाग’ रेलवे स्टेशन है। यहां आने के लिए कई डीलक्स और एक्सप्रेस बस सेवाएं उपलब्ध हैं। अगर आप शहर की यात्रा करना चाहते हैं तो ऑटो रिक्शा, बस, साइकिल रिक्शा या कैब की मदद ले सकते हैं।

मेहरानगढ़ किले के बारे में रोचक तथ्य – Interesting Facts about Mehrangarh Fort in Hindi

  • यह किला दिल्ली के कुतुब मीनार की ऊंचाई से भी 73 मीटर ऊंचा है। किले के परिसर में चामुंडा देवी का मंदिर भी है। स्थानीय लोगों की मान्यता है कि देवी इसी किले से पूरे शहर की निगरानी रखती हैं।
  • इस किले के एक योद्धा कीरत सिंह सोडा के सम्मान में यहाँ एक छतरी भी बनाई गई है। छतरी एक गुंबद के आकार का मंडप है जो राजपूतों की समृद्ध संस्कृति में गर्व और सम्मान व्यक्त करने के लिए बनाया जाता है।
  • जब आप इस किले को देखने के लिए जायेंगे तो इसके मुख्य द्वार के सामने आपको कुछ लोग लोक नृत्य करते नजर आयेंगे।
  • किले के अन्दर के एक हिस्से को संग्रहालय में बदल दिया गया, जहाँ पर शाही पालकियों का एक बड़ा समावेश देखने को मिलता है।
  • इस संग्रहालय में 14 कमरे हैं, जो शाही हथियारों, गहनों और वेशभूषाओं से सजे हैं।

और अधिक लेख –

  • आमेर के किले का इतिहास और तथ्य
  • आगरा किले का इतिहास और सच
  • दिल्ली लाल किले का इतिहास
  • सिटी पैलेस जयपुर का इतिहास और जानकारी

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मेहरानगढ़ किला की अजब गजब कहानी | Mehrangarh Fort

मेहरानगढ़ किला अपनी शानदार वास्तुकला और इसके साथ जुड़े विविध इतिहास के कारण जोधपुर में जगह का गौरव रखता है। राजस्थान के सबसे दुर्जेय और शानदार किलों में से एक माना जाता है, मेहरानगढ़ किला राव जोधा द्वारा वर्ष 1459 में बनाया गया था। किला 5 किमी के क्षेत्र में फैला हुआ है और जोधपुर शहर के बाहरी इलाके में 125 मीटर ऊंची पहाड़ी पर बनाया गया है।

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मेहरानगढ़ किले की जानकारी | Mehrangarh Fort Information in hindi

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मेहरानगढ़ किले में सात द्वार हैं, जिनका उपयोग मेहरानगढ़ किले में प्रवेश करने के लिए किया जा सकता है। ये 7 द्वार विभिन्न शासकों द्वारा बनाए गए हैं, और बीकानेर और जयपुर सेनाओं पर जीत के सम्मान में बनाए गए हैं।

मेहरानगढ़ किले में स्थित मुख्य महल मोती महल, फूल महल, शीश महल, जनाना डूड, तख्त विलास और झाँकी महल हैं। किले के अंदर दो मंदिर भी स्थित हैं – चामुंडी देवी मंदिर और नागनेचियाजी मंदिर, जो क्रमशः देवी दुर्गा और कुलदेवी को समर्पित हैं।

मेहरानगढ़ किले के भीतर एक संग्रहालय भी है, जो पालकी, संगीत वाद्ययंत्र, शाही पालने, वेशभूषा, हथियार, फर्नीचर और चित्रों का एक समृद्ध संग्रह प्रदर्शित करता है।

मेहरानगढ़ किला एक खड़ी चट्टान पर सौ फीट भव्यता में खड़ा है, जोधपुर के क्षितिज से चार सौ फीट ऊपर जले हुए लाल बलुआ पत्थर, भव्य, अजेय, और फिर भी एक अजीब भूतिया सुंदरता के साथ है। सूर्य के गढ़ के बारे में बहुत कुछ लिखा गया है, वास्तव में, यह पूरे राजस्थान में सबसे प्रभावशाली में से एक है। इसके अनुपात इतने विशाल हैं कि रुडयार्ड किपलिंग ने इसे “दिग्गजों का काम” कहा। आज, इसे भारत में सबसे अच्छे संरक्षित किलों में से एक माना जाता है।

पूरे भारत में, आनंदमय झूला उत्सव का एक अभिन्न अंग है जो वसंत या मानसून के मौसम के आगमन का प्रतीक है – दोनों रोमांस और प्रजनन क्षमता से जुड़े हैं। मानसून के दौरान मारवाड़ के उद्यान महलों में झूले लगाए गए थे, जब महाराजा शाही महिलाओं के साथ समारोह में भाग लेते थे।

धातु के फ्रेम पर लगे साबुन के पत्थर से बने इस झूले को आधार पर चार हंस के आकार के हुक से जुड़ी जंजीरों का उपयोग करके लटका दिया गया था। झूलने का कार्य प्राचीन भारतीय ग्रंथों में प्रजनन अनुष्ठानों से जुड़ा हुआ है जिसमें एक पुजारी या संप्रभु झूला पर झूलता है, पृथ्वी और आकाश को जोड़ता है और अपनी भूमि और लोगों पर स्वर्ग का आशीर्वाद मांगता है।

विविध इतिहास और सांस्कृतिक विरासत से जुड़े होने के अलावा मेहरानगढ़ किला एक वास्तुशिल्प आश्चर्य है। किले को राजस्थान राज्य के लुभावने किलों में से एक माना जाता है। जोधपुर में स्थित मेहरानगढ़ किला शायद भारत के अंदर सबसे बड़ा किला है।

यहां राव जोधा मार्ग पर 1459 के आसपास काम कराया गया और 410 फीट की दूरी पर शहर को मजबूत करने की व्यवस्था की गई है. अपनी सीमाओं से घिरे, वर्तमान समय के कुछ महलों में अपनी अप्रत्याशित इच्छा को स्वीकार करने के लिए दूरस्थ स्थान हैं।

जैसे ही शहर उतरना शुरू होता है, एक ज़िगज़ैग दर्शाता है। गढ़ के एक तरफ केत्री सिंह सोडा छाता है, जो एक योद्धा है जो मेहरानगढ़ की सुरक्षा पर दस्तक देता है। मेहरानगढ़ किले का नाम मेहर-गढ़ से लिया गया है: मेहर का अर्थ है सूर्य और गढ़ का अर्थ है किला। स्थानीय भाषा के उच्चारण के कारण मेहर-गढ़ को मेहरानगढ़ के नाम से जाना जाने लगा।

मेहरानगढ़ किले के अंदर, ऐतिहासिक केंद्र राजस्थान में एक सुसज्जित गैलरी की दुकान है। इंटीरियर का गढ़ यहूदी बस्ती का गढ़ है, जो वर्तमान युग में एक रिक्शा है, और काउंटी एक्सपैंड द्वारा क्यूरेट किया गया है, जिसने गुजरात के शासक के खिलाफ लड़ाई लड़ी है। ऐतिहासिक केंद्र अनुष्ठानों, वीजा, वेशभूषा, ललित कला और एक समृद्ध युग के बारे में विरासत दिखाता है।

मेहरानगढ़ में स्थित किला राजस्थान का एक महान संग्रहालय है। महल संग्रहालय के एक हिस्से में, यहाँ पुराने शाही महलों का एक वर्गीकरण है, साथ ही विस्तृत गुंबद गिल्ड महडोल पालकी है जो १७३० में गुजरात के राज्यपाल द्वारा लड़ी गई थी। संग्रहालय राठौर के हथियारों, परिधानों और विरासत का प्रदर्शन है। , पेंटिंग और सजाए गए अवधि।

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मेहरानगढ़ किले और उसके अभिशाप की कहानी

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जोधपुर में मेहरानगढ़ किले की नींव के नीचे एक ऐसे व्यक्ति की कब्र है जो एक गंभीर अभिशाप को खत्म करने के लिए मर गया था।

एक महत्वाकांक्षी राजा और भयानक अभिशाप

बहुत समय पहले, राव जोधा नाम का एक महत्वाकांक्षी राजा जोधपुर में एक राजसी पहाड़ी के पास आया और उसमें से एक राजसी किला बनाने का फैसला किया। उसने दृढ़ मन से अपने आदमियों को आदेश भेजा कि वह पहले पहाड़ी पर रहने वाले लोगों को हटाकर उसकी इच्छा को पूरा करे, और फिर अपने सपनों के किले की नींव का निर्माण करे।

शाही का पालन करने वाला हर कोई एक बूढ़े आदमी को छोड़कर, एक संत को छोड़ देगा, जिसे चिड़ियावाले बाबा के नाम से जाना जाता था, क्योंकि वह पक्षियों को खिलाने और उनकी देखभाल करने में प्रसन्न था। राजा के शासनादेश से बहुत परेशान होकर, संत ने राजा को श्राप दिया कि यदि वह पहाड़ी पर अपने सपनों का महल खड़ा करता है तो उसका राज्य बार-बार सूखे से प्रभावित होगा।

संत ही रास्ता दिखाते हैं

भयानक श्राप सुनकर स्तब्ध और भयभीत राजा ने चिड़ियावाले बाबा के चरणों में आत्मसमर्पण कर दिया और क्षमा मांगी। अपने शब्दों को वापस लेने में असमर्थ, संत ने शाप को बेअसर करने का एकमात्र उपाय प्रस्तुत किया – राज्य के किसी व्यक्ति को जानबूझ कर जिंदा दफन करके अपना जीवन देना होगा।

जब राजा अपनी प्रजा के बीच एक उद्धारकर्ता खोजने में विफल रहा, तो राजाराम मेघवाल नाम का एक नेक दिमाग वाला व्यक्ति अपने जीवन का बलिदान देने के लिए आगे आया। और इस प्रकार, राजाराम मेघवाल को एक शुभ दिन और एक शुभ स्थान पर जिंदा दफनाया गया ताकि मेहरानगढ़ किले की नींव रखी जा सके। वर्ष १४५९ था।

राजाराम का स्मारक

राजाराम मेघवाल के महान बलिदान को श्रद्धांजलि देने के लिए, किले की जगह पर उनकी कब्र के ऊपर एक बलुआ पत्थर का स्मारक बनाया गया था। आगंतुकों को महत्वपूर्ण घटना के बारे में परिचित कराने के लिए उनका नाम, दफनाने की तारीख और अन्य प्रासंगिक विवरण दफन के पत्थर पर उकेरे गए हैं।

सती हस्तलिपि भित्ति चित्र

शाही परिवारों की महिलाएं अक्सर पति की मृत्यु की स्थिति में या एक विजयी प्रतिद्वंद्वी द्वारा अपमान से बचने के लिए अपने पति की अंतिम संस्कार की चिता पर खुद को जिंदा जलाकर सती होती हैं। मेहरानगढ़ किले में लोहा पोल (लौह गेट) के बाईं ओर, पूर्व राजाओं में से एक, महाराजा मान सिंह, जिन्होंने वर्ष 1843 में सती हुई थी, के पति या पत्नी के लगभग 15 या तो हस्त-चित्र हैं।

मेहरानगढ़ किले में देखने के लिए कई अन्य चीजें हैं, जैसे कि फूल महल, चांदी की कलाकृतियां, लघु चित्र और पेंटिंग, किले द्वारा पेश किए गए नीले शहर के व्यापक दृश्य। फिर भी, ‘सूर्य का किला’ सती के निशान और राजाराम मेघवाल के स्मारक स्थल के लिए देखने वाले की आत्मा को हिला देता है।

मेहरानगढ़ किले का इतिहास और जानकारी | Mehrangarh Fort History in hindi

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राव जोधा की रथरा जनजाति की नाबाद हार भारत में जोदापुर के जन्मस्थान के रूप में स्वीकार कर रही है। उसने जोधापुर को मारवाड़ के केंद्र के रूप में स्थापित किया। वह व्यक्तिगत रूप से औसतन 24 बच्चे थे और पांचवें रेथ्रोस्लाडर बन गए। हालांकि, पद के इस खंड को प्रवेश मार्गों के संबंध में उठाया गया है। प्रवेश मार्गों पर देखे गए बहुमत हैं: जय पॉल और महाराजा मान सिंह ने 1806 में जयपुर और बीकानेर में संपत्ति की विजय की प्रशंसा की। 1707 में, मुगलों से अधिक, विजय पूल ने प्रशंसा की दिशा में काम किया।

डेडकाग्रा पूल में अभी भी तोपखाने द्वारा हमले के निशान हैं। किले के कई बुर्जों में लौह पूल अंतिम प्रवेश द्वार है। तुरंत एक तरफ बारिश के निशान हैं, जो 1843 में अपने महत्वपूर्ण महाराजा मान सिंह की स्मारक सेवा की आग में जल गए थे। राव जोधा ने राव नारा की मदद से मंडोर से 9 किमी दूर भौचेरिया पहाड़ी पर किले की नींव रखी।

किले की नींव चरण जाति के ऋषि की पुत्री श्री करणी माता ने रखी थी। चूंकि राठौरों के मुख्य देवता सूर्य-देवता थे इसलिए किले का नाम मेहरानगढ़ रखा गया जहां मेहरान का अर्थ सूर्य और गढ़ का अर्थ किला था।

किले की नींव राव जोधा के शासनकाल के दौरान रखी गई थी और कई शासकों द्वारा जारी रखा गया था। माल्डेन ने 1531 से 1562 तक शासन किया और किले के अंदर कुछ संरचनाओं का निर्माण किया। फिर 1707 से 1724 तक शासन करने वाले महाराजा अजीत सिंह ने कुछ संरचनाओं का निर्माण किया। उनके बाद, अगला राजा जिसने किले का निर्माण किया, वह महाराजा तख्त सिंह थे जिन्होंने 1843 से 1872 तक शासन किया। अंतिम शासक महाराजा हनवंत सिंह थे जिन्होंने 1947 से 1952 तक शासन किया। राव जोधा ने लगभग रु। किले के निर्माण के लिए नौ लाख।

मेहरानगढ़ किला की उत्पत्ति मंडोर के शासक राव जोधा और जोधपुर शहर के संस्थापक के कारण हुई है। जब राव जोधा ने अपनी राजधानी को जोधपुर में एक सुरक्षित और ऊंचे स्थान पर स्थानांतरित करने का फैसला किया, तो उन्होंने 1459 में भाकुरचेरिया उर्फ ​​​​द माउंटेन ऑफ बर्ड्स नामक पहाड़ी पर इस विशाल किले की नींव रखी। किले की आधारशिला एक महिला योद्धा ऋषि करणी माता ने रखी थी।

किंवदंती है कि राव जोधा को किले के निर्माण के लिए पहाड़ी के एकमात्र निवासी, चीरिया नाथजी नामक एक साधु को स्थानांतरित करना पड़ा था। क्रोधित साधु ने श्राप दिया कि किले को हमेशा के लिए पानी की कमी झेलनी पड़ेगी। उसे प्रसन्न करने के लिए राजा ने किले के प्रांगण में उसके लिए एक मंदिर और एक घर बनवाया।

कुछ स्थानीय कहानियां यह भी कहती हैं कि राव जोधा ने शाप के प्रभाव को खत्म करने के लिए किले की नींव में राजा राम मेघवाल नाम के एक आम आदमी को जिंदा दफना दिया था। चूंकि वह व्यक्ति स्वेच्छा से अपने जीवन का बलिदान करने के लिए सहमत हो गया था, राजा ने अपने परिवार की देखभाल करने का वादा किया और अपने वादे को पूरी लगन से पूरा करना जारी रखा।

इन वर्षों में, राव जोधा के उत्तराधिकारियों ने किले की संरचना में बहुत योगदान दिया। उन्होंने किले की दीवारों और द्वारों को मजबूत किया और परिसर के भीतर नए महलों और मंदिरों का निर्माण भी किया। यह 17 वीं शताब्दी में था, मारवाड़ के जसवंत सिंह के शासनकाल के दौरान, किला आज हम जो देखते हैं, उसमें बनाया गया था।

विभिन्न राजाओं और शाही लोगों की मृत्यु | Death of various kings and royal people

ऐसे कई उदाहरण थे जहां या तो शाही लोगों के राजा मारे गए थे। 1873 से 1895 तक शासन करने वाले जसवंत सिंह ने अपनी मालकिन को खिड़की से बाहर फेंक कर मार डाला। उसे मार दिया गया क्योंकि वह जसवंत सिंह के पिता की थी और उसके कमरे में घुस गई।

महाराजा मान सिंह, जिन्होंने १८०३ से १८४३ तक शासन किया, ने अपने प्रधान मंत्री को 400 मीटर नीचे गिराकर मार डाला। 1678 से 1724 तक शासन करने वाले महाराजा अजीत सिंह को उनके बेटे ने मार डाला था। १५१५ से १५३२ तक शासन करने वाले राव गंगा खिड़की से नीचे गिर गए और हवा का आनंद लेते हुए उनकी मृत्यु हो गई। यह भी कहा जाता है कि मालदेन ने राव गंगा को खिड़की से धक्का दिया।

निर्माण के बारे में किंवदंती | The legend regarding the Construction

किले के निर्माण के लिए, राव जोधा ने चीरिया नाथ जी नामक एक ऋषि को बलपूर्वक स्थानांतरित कर दिया, जिन्होंने राजा को श्राप दिया कि किला सूखे से पीड़ित होगा। राव जोधा ने उसके लिए एक मंदिर और एक घर बनाकर साधु को प्रसन्न किया।

जब निर्माण शुरू हुआ, तो अगले दिन इसे नष्ट कर दिया गया। ऐसा ऋषि के श्राप के कारण हुआ। राजा ने उससे शाप वापस लेने का अनुरोध किया लेकिन साधु ने कहा कि शब्द वापस नहीं लिए जा सकते। साधु ने बताया कि यदि वह किसी व्यक्ति को जीवित गाड़ देगा तो श्राप समाप्त हो जाएगा। इसलिए राजा ने राजा राम मेघवाल नाम के एक व्यक्ति को नींव में जिंदा दफना दिया और उससे वादा किया कि राठौर उसके परिवार की देखभाल करेंगे। इसी के चलते राजा राम मेघवाल की वर्तमान पीढ़ी राजा राम मेघवाल के बगीचे में रह रही है।

किले और शहर का नीला रंग | Blue Color of the fort and the city

ऐसा माना जाता है कि नीला रंग गर्मी और मच्छरों को दूर भगाता है और यही कारण है कि किले के कई हिस्सों को नीले रंग से रंगा गया है। पर्यटक किले से शहर को देख सकते हैं जो नीला भी दिखता है।

पहले, जोधपुर को ब्रह्मपुरी के नाम से जाना जाता था और केवल ब्राह्मण ही शहर में रह सकते थे और अपने घरों को नीले रंग से रंग सकते थे।

मेहरानगढ़ किला वास्तुकला | Mehrangarh Fort Architecture

जोधपुर में घूमने के लिए सबसे अच्छी जगहों में से एक मेहरानगढ़, विभिन्न स्थापत्य शैली का उत्सव है। किला और उसके भीतर की संरचनाएं १५वीं शताब्दी के मध्य से २०वीं शताब्दी तक पांच शताब्दियों की लंबी अवधि में बनाई गई थीं। इसलिए, इसकी वास्तुकला विभिन्न युगों के प्रभावों और तत्वों को दर्शाती है, जो इसे एक अनूठा आकर्षण प्रदान करती है।

किला 5 किमी के क्षेत्र में फैला हुआ है. और दीवारों से घिरा हुआ है जो लगभग 117 फीट लंबा और 70 फीट चौड़ा है. कुछ स्थानों पर किले की दीवारें 120 फीट की ऊंचाई तक उठती हैं, जो इसकी दुर्जेय संरचना को जोड़ती हैं। किले की दीवारों को सुशोभित करने वाले सात खूबसूरत द्वार हैं, जो अलग-अलग कारणों से अलग-अलग समय पर बने हैं। किले के परिसर में कई शानदार ढंग से सजाए गए महल और मंदिर भी हैं।

मेहरानगढ़ किला आज | Mehrangarh Fort Today

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आज, मेहरानगढ़ किले की यात्रा जोधपुर में सबसे आश्चर्यजनक चीजों में से एक है। शानदार महलों और विशाल प्रांगणों के अलावा, किले में एक भव्य संग्रहालय और एक आंतरिक संग्रहालय की दुकान भी है। किले के भीतर लगभग हर दिन लोक नृत्य और सांस्कृतिक प्रदर्शन होते हैं।

किले का एक अन्य प्रमुख आकर्षण चोकलाओ बाग है, जो 18 वीं शताब्दी का एक खूबसूरती से बहाल उद्यान है, जो खुली हवा में चोकलाओ महल रेस्तरां का स्थान भी है। आप रेस्तरां में एक यादगार कैंडललाइट डिनर का आनंद ले सकते हैं, जबकि एक तरफ रोशनी वाले किले और दूसरी तरफ शहर के शानदार दृश्यों का आनंद ले सकते हैं। अगर आप एडवेंचर के शौकीन हैं तो किले में जिप-लाइनिंग भी ट्राई कर सकते हैं।

हर साल, अक्टूबर के महीने में पांच दिनों के लिए किले में राजस्थान अंतर्राष्ट्रीय लोक महोत्सव मनाया जाता है। यह किला फरवरी में आयोजित होने वाले विश्व सूफी आत्मा महोत्सव के आयोजन स्थलों में से एक है। किले में गणगौर और दशहरा जैसे पारंपरिक त्योहार भी बहुत धूमधाम और भव्यता के साथ मनाए जाते हैं। वर्तमान में, महाराजा गज सिंह द्वितीय, वर्तमान राठौड़ वंश प्रमुख, मेहरानगढ़ के संरक्षक हैं।

राव जोधा डेजर्ट रॉक पार्क, जो किले के निकट स्थित है, मेहरानगढ़ आने वाले यात्रियों के लिए एक और प्रमुख आकर्षण है।

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मेहरानगढ़ संग्रहालय | Mehrangarh Museum

मेहरानगढ़ किले के संग्रहालय में कलाकृतियों और सजावटी कलाओं का अद्भुत संग्रह प्रदर्शित करने वाली विभिन्न दीर्घाएं हैं। मेहरानगढ़ किला संग्रहालय में दीर्घाओं में शामिल हैं

  • हाथी हावड़ा गैलरी: 18 वीं और 19 वीं शताब्दी से हावड़ा (हाथियों की सवारी के लिए इस्तेमाल की जाने वाली सीटें), जिसमें चांदी का हावड़ा भी शामिल है जिसे शाहजहाँ ने महाराजा जसवंत सिंह को भेंट किया था।
  • दौलत खान गैलरी: इस किले के कुछ शानदार खजाने, जिनमें सम्राट अकबर की कुछ यादगार चीज़ें भी शामिल हैं
  • पगड़ी गैलरी: राजस्थान में विभिन्न त्योहारों और अवसरों पर विभिन्न समुदायों और क्षेत्रों द्वारा उपयोग की जाने वाली विभिन्न प्रकार की पगड़ी
  • पालकी गैलरी: पालकियों का एक शानदार संग्रह जिसमें पिंजस (ढकी हुई पालकी) और रजत खासा (कमल के आकार की पालकी) शामिल हैं, कुछ का उल्लेख करने के लिए
  • पेंटिंग गैलरी: मारवाड़ स्कूल से संबंधित लघु चित्रों और कलाकृति का एक अच्छा संग्रह
  • टेक्सटाइल गैलरी: विभिन्न सदियों से कीमती कालीन, छतरियां, फर्श-फैल, तम्बू की दीवारें, वस्त्र और अन्य साज-सामान
  • सिलेह खाना या आर्म्स गैलरी: राव जोधा के खंडा सहित कई राजाओं और सम्राटों की तलवारें जिनका वजन 7 पाउंड से अधिक है और सम्राट अकबर और तैमूर की तलवारें हैं।
  • वुड क्राफ्ट गैलरी: लकड़ी से उकेरी गई और सोने की पॉलिश और हाथीदांत से सजी कई कलाकृतियां
  • पालना गैलरी: पालने का एक दुर्लभ संग्रह जिसमें वर्तमान राजा के लिए डिज़ाइन किया गया इलेक्ट्रिक पालना शामिल है

राष्ट्रीय भूवैज्ञानिक स्मारक | National Geological Monument

मजबूत किले के अंदर के शाही महल बहुत ही अच्छे और खूबसूरत हैं। इनमें शामिल हैं, मोती महल, कांच महल (दर्पण महल), सीढ़ी और धन घर। ऐतिहासिक केंद्र में हुड, अधोवस्त्र, शाही सहायक, छोटे उपकरण, उपकरण, नक्काशी और फर्नीचर का संग्रह है।

महल के घर के बैरिकेड्स प्राचीन बंदूक की रक्षा करते हैं, और शहर के अद्भुत दृश्य प्रस्तुत करते हैं। जोधपुर समूह जिस पर मेहरानगढ़ किले को बड़े पैमाने पर विकसित किया गया है, को राष्ट्र में पर्यावरण पर्यटन का समर्थन करने के लिए भूवैज्ञानिक अध्ययन भारत द्वारा राष्ट्रीय भूवैज्ञानिक परिभाषा कहा गया है। भौगोलिक तत्वों में से एक तर्डेस्ट जिले में पाए जाने वाले मैडेनिंग समूह का एक टुकड़ा है, जिसका क्षेत्रफल 43,500 किमी 2 है। यह उपन्यास प्रशांत और उपमहाद्वीप में पिरामिड स्टेज के पिघलने की क्रिया की अंतिम अवधि की महत्वपूर्ण रूप से बात करता है।

माताजी मंदिर | The Mataji Temple

चामुंडा माताजी राव जोधा की प्रिय मूर्ति थीं, जिन्होंने 1460 में मंडोर के पुराने केंद्र से उनकी प्रतिमा लाकर मेहरानगढ़ में स्थापित की थी। माताजी चामुंडा मंडोर के शासक शासक के कोल देव बनें। वह शाही परिवार और अष्ट की देवी थीं। अन्यथा एक देवता को अपनाया है और जोधापुर के अधिकांश लोगों ने भी उसकी पूजा की है।

राव जोधा डेजर्ट पार्क | Rao Jodha Desert Park

मेहरानगढ़ किले से सटे राव डेजर्ट डेजर्ट रॉक पार्क, 177,916 एकड़ से अधिक में फैला है। मनोरंजन केंद्र में प्राकृतिक रूप से बसे रेगिस्तान और निर्जलित पौधों को शामिल किया गया है। पुनर्वास केंद्र 2006 में एक बड़े, भ्रष्ट क्षेत्र के मानक को बहाल करने की कोशिश करने के लिए बनाया गया था और इसके तत्वावधान में, फरवरी 2011 में सामान्य आबादी के लिए खोला गया था।

केंद्र में और पुनर्वास केंद्र के आसपास ज्वालामुखीय चट्टानें हैं अस्पष्ट प्रगति, उदाहरण के लिए, रॉलाइट और ब्रासिया, कलाकृति की व्यवस्था। पुनर्वास केंद्र अतिथि केंद्र को निकासी गैलरी, स्थानीय पौधे नर्सरी, छोटी हवेली और बिस्टरो से जोड़ता है।

मेहरानगढ़ में जिप लाइनिंग | Zip Lining at Mehrangarh

जोधपुर फ्लाइंग फॉक्स मेहरानगढ़ किले में जिप लाइनिंग गतिविधियों की पेशकश करता है। यह आपको किले के साथ-साथ इसके कदम-कुएँ, युद्धों, झीलों, राव जोधा इको-पार्क और जोधपुर शहर के अविश्वसनीय दृश्यों का आनंद लेने की अनुमति देता है।

  • समय: सुबह(AM) 9:00 बजे से शाम(PM) 5:00 बजे तक
  • अवधि: ४५ से ९० मिनट
  • लागत: ₹ 1400 के बाद, सत्र और चुने गए ज़िपों की संख्या के आधार पर

मेहरानगढ़ किला परिसर में देखने लायक चीज़ें | Things to See in the Mehrangarh Fort Complex

राजसी किले में पर्यटकों के देखने के लिए बहुत कुछ है। मेहरानगढ़ किले में देखने योग्य शीर्ष चीजों में शामिल हैं:

  • शीश महल या हॉल ऑफ मिरर्स, महाराजा अजीत सिंह का शयनकक्ष जो गहन रूप से कांच के काम से सजाया गया है।
  • फूल महल या फूलों का महल, अभय सिंह द्वारा निर्मित एक अलंकृत स्वागत कक्ष जो 18 वीं के मध्य का है इसकी स्थापत्य शैली शाहजहाँ के महलों से मेल खाती है।
  • मोती महल या मोतियों का महल, मोतियों की चमक को प्रदर्शित करने वाला एक सुंदर कक्ष। यहां रानियां अनदेखी बैठकर कोर्ट की कार्यवाही सुनती थीं।
  • तख्त विलास, खिड़कियों में रंगीन कांच के शीशों से सजाया गया एक बड़ा आंतरिक कमरा। यह तख्त सिंह का निजी कक्ष था।
  • जयपुर और बीकानेर की सेनाओं पर अपनी जीत का जश्न मनाने के लिए महाराजा मान सिंह द्वारा 1806 में बनाया गया जयपोल।
  • फतेहपोल का निर्माण 1707 में महाराजा अजीत सिंह ने मुगल सेना पर अपनी जीत के उपलक्ष्य में करवाया था। हाथियों के किसी भी हमले को रोकने के लिए इसमें स्पाइक्स हैं।
  • डेढ़ कामगड़ा पोल जहां हमलावर जयपुर सेना द्वारा तोपों के गोले दागे जाने का असर देखा जा सकता है।
  • किले के फाटकों में से एक इमरीतिया पोल
  • सूरज पोल, वह द्वार जो संग्रहालय की ओर जाता है
  • किरत सिंह सोडा की छतरी, एक विस्तृत संरचना जो उस स्थान को चिह्नित करती है जहां 1808 में किले की रक्षा करते समय एक सैनिक गिर गया था।

मेहरानगढ़ किले, जोधपुर के बारे में कम ज्ञात तथ्य | Lesser-known Facts about Mehrangarh Fort, Jodhpur

  • मेहरानगढ़ नाम का अर्थ है ‘सूर्य का गढ़’, जो पौराणिक दावे को दर्शाता है कि राठौड़ सूर्य देव के वंशज हैं।
  • किले की एक दीवार पर हाथ के निशान हैं जो माना जाता है कि शाही महिलाओं ने अपने पति की चिता पर सती या आत्मदाह किया था।
  • किला कई हॉलीवुड और बॉलीवुड फिल्मों का स्थान था, जिनमें द डार्क नाइट राइजेज (2012), द जंगल बुक (1994), और आवारापन (2007) शामिल हैं।
  • 2015 में, रेडियोहेड गिटारवादक और संगीतकार जॉनी ग्रीनवुड, रेडियोहेड निगेल गॉड्रिच के निर्माता और संगीतकार शाय बेन त्ज़ुर ने किले में एक संयुक्त संगीत एल्बम रिकॉर्ड किया।
  • किले में हर दिन दोपहर करीब 3:30 बजे से शाम 4:00 बजे तक बड़ी संख्या में चील इकट्ठा होते हैं। किले के प्रबंधन में एक व्यक्ति है जो चोकलाओ गार्डन के सामने एक टॉवर के ऊपर से चील को खिलाने के लिए लगा हुआ है।
  • रुडयार्ड किपलिंग ने किले को स्वर्गदूतों, दानवों और परियों के काम के रूप में वर्णित किया।

मेहरानगढ़ किले तक कैसे पहुंचे | How to Reach the Mehrangarh Fort, Jodhpur

किले तक पहुंचने के लिए इसके सात द्वारों से गुजरना पड़ता है। बीकानेर और जयपुर की सेनाओं पर विजय के सम्मान में सातों के प्रत्येक द्वार को एक अलग शासक द्वारा बनवाया गया है। फाटकों पर अभी भी बीते युग में लड़ी गई लड़ाइयों के निशान हैं। किले के दूसरे द्वार पर एक कैनन बॉल का निशान है, जो युद्धों के दौरान जयपुर की सेनाओं पर हमला करने के परिणामस्वरूप होता है।

अन्य द्वारों में से एक को जयपोल कहा जाता है जिसका अर्थ है जीत और इसे महाराजा मान सिंह ने जयपुर और बीकानेर सेनाओं पर अपनी जीत का जश्न मनाते हुए बनाया था। एक अन्य द्वार को फतेहपोल कहा जाता है जिसका फिर से अर्थ है जीत। इसे महाराजा अजीत ने मुगलों को हराने का जश्न मनाते हुए बनवाया था।

संस्कृति | Culture

महल में लोक संगीतकारों को दरवाजे पर रखा जाता है और संग्रहालयों, रेस्तरां, प्रदर्शनियों और शिल्प बाजारों में घरों के साथ-साथ डिज्नी की 1994 की रियल टू लाइफ मोशन पिक्चर द जंगल बुक, 2012 की फिल्म द डार्क नाइट राइजेज की तरह है। आखिरी के लिए हेड फोटोग्राफी 6 मई, 2011 को शुरू हुई थी। इमरान हाशमी स्टारर अवरण को भी इसी तरह शूट किया गया था।

2015 में, महल इजरायली लेखक शे बेन ज़ोर, अंग्रेजी लेखक और रेडियो प्रमुख गिटारवादक जॉनी ग्रीनवुड और रेडियो हेड निर्माता निगेल गॉड्रिच सहित कलाकारों की सहायता से एक संग्रह रिकॉर्ड करता था। क्रॉनिकल जून का विषय था, अमेरिकी प्रमुख पॉल थॉमस एंडरसन द्वारा एक कथा। मार्च 2018 में, लेमन बॉलीवुड फिल्म ठग्स ऑफ इंडिया के फिल्म समूह ने शैटॉ को अपने शूटिंग क्षेत्रों में से एक के रूप में उपयोग किया। 15 अभिनेता अमिताभ बच्चन ने अपने आधिकारिक ब्लॉग पर अपने अनुभव के बारे में एक बुद्धिमान पोस्ट छोड़ी। (Information About Hawa Mahal )

मेहरानगढ़ किले का मालिक कौन है?

महाराजा गज सिंह II राठौर कबीले के वर्तमान प्रमुख और किले के संरक्षक महाराजा गज सिंह द्वितीय ने इमारतों को संरक्षित किया है और संग्रहालय को अपने पूर्ववर्तियों के जीवन के रिकॉर्ड के रूप में विकसित किया है।

मेहरानगढ़ किले को मेहरानगढ़ क्यों कहा जाता है?

राठौड़ वंश के लिए, सूर्य सभी देवताओं में सबसे श्रेष्ठ था। इसलिए, उन्होंने किले का नाम ‘मेहरानगढ़’ रखा, एक ऐसा नाम जो दो शब्दों से बना है: ‘मिहिर’, जो सूर्य के लिए खड़ा है, और ‘गढ़’ किले को दर्शाता है। स्थानीय लोग धीरे-धीरे अपने स्थानीय उच्चारण में मेहर-गढ़ को मेहरानगढ़ कहने लगे, इसलिए यह नाम पड़ा।

मेहरानगढ़ किला क्यों भुतहा है?

मेहरानगढ़ का किला जितना खूबसूरत है उतना ही पेचीदा। किले की नींव राव जोधा ने 1459 में रखी थी। इसके निर्माण की प्रक्रिया में, पहाड़ी की चोटी पर रहने वाले एक साधु को विस्थापित कर दिया गया था। … इसके बाद, राव और उनके परिवार के साथ दुर्भाग्य की एक श्रृंखला आई और किला इन बुरी भावनाओं से ग्रस्त है।

क्या हम मेहरानगढ़ किले के अंदर जा सकते हैं?

मेहरानगढ़ किला प्रतिदिन जनता के लिए खोला जाता है। गर्मी का समय: 8 से 13 बजे और 14 से 17 बजे तक। शीतकालीन समय: 9 से 13 बजे और 14 से 17 बजे।

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3 thoughts on “मेहरानगढ़ किला की अजब गजब कहानी | mehrangarh fort”.

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मेहरानगढ़ किले का इतिहास और रहस्य-Mehrangarh Fort in Hindi

अगर आप ऐतिहासिक किलो और महलों को देखने यह उनके बारे में जाने के शौकीन है तो आपको इसके लिए के बारे में जरूर जानना चाहिए वैसे तो राजस्थान में बहुत सारे ऐतिहासिक इमारतें और महल और किले है लेकिन जोधपुर का यह मेहरानगढ़ किला बहुत ही अनोखा है और मेहरानगढ़ का इतिहास और रहस्य और भी खास है यह मेहरानगढ़ किला भारत के सभी बड़ी इमारतों में से एक है यह किला 1459 में राव जोधा द्वारा बनाया गया था यह किला 410 फीट की ऊंची पहाड़ी की चोटी पर बना हुआ है यह किला काफी बड़ी और मोटी दीवारों से घिरा हुआ है इन दीवारों पर कार्यगिरी बहुत ही खास और महीन है इस किले को बनाने के लिए लाल बलुआ पत्थर का प्रयोग किया गया है इस किले से जोधपुर का बेहतरीन नजारा और पाकिस्तान एकदम साफ दिखाई देता है

यहां मेहरानगढ़ किले पर कई तरह की हॉलीवुड और बॉलीवुड मूवी की शूटिंग भी हुई है जैसे द लायन किंग, द डार्क नाइट राइस, और ठग्स ऑफ हिंदुस्तान के नाम शामिल है जोधपुर की विशेषता है यहां पर कृत्रिम झील और कुएं है मेहरानगढ़ किले में एक कुआं अधिक 135 मीटर गहरा है इन सबके बावजूद भी वहां पर पानी की कमी अधिकतर महसूस की जाती थीऐसा माना जाता है कि इसके पीछे एक श्राप है जो कि एक साधु ने दिया था तो आप जरुर जानना चाहेगें मेहरानगढ़ का इतिहास और रहस्य.

मेहरानगढ़ किले का इतिहास (Mehrangarh Fort History in Hindi) :-

राव जोधा जोधपुर के राजा रणमल की 24 संतानों में से एक थे वह जोधपुर के 15 वे शासक थे शासन की बागडोर संभालने के 1 साल बाद राव जोधा को लगने लगा कि मंडोर का किला असुरक्षित है उन्होंने अपने तत्कालीन किले से 9 किलोमीटर दूर एक पहाड़ी पर एक किला बनाने का विचार प्रस्तुत किया इस पहाड़ी  को वोट चिड़िया के नाम से भी जाना जाता था क्योंकि यहां पर बहुत से पक्षी रहते थे राव जोधा ने 12 मई 1459 को इस पहाड़ी पर नीव डाली महाराज जसवंत सिंह  ने 1638-78 मैं पूरा किया था वहाँ एक श्राप का  रहस्य है और ये रहस्य आज भी वह मोजूद है.

मेहरानगढ़ किले का रहस्य   ( Mystery of Mehrangarh Fort ) :-

किले के निर्माण से पहले वह एक साधु रहते थे वे एक पानी के स्रोत के पास रहते थे राजा ने उने वह से जाने के लिए कहाँ और साधु वह से नही जा रहे थे तो वह से जाने के लिए जबार दस्ती की तो  साधु नेश्राप देते हुए कहाँ की जिस पानी के स्रोत के लिए तुम मुझे हटा रहे हो वह सुख जायेगा तब से किले के आसपास के इलाको में पानी की कमी बनी रही ये देख के राजा ने माफ़ी मांगी और उने प्रसन करने के लिए एक कोठी भी बनवाई जहाँ वे साधना किया करते थे और इस  श्राप का ऊपाए भी किया लेकिन श्राप का असर आज भी देखने को मिलता है यहाँ 4-5 साल में एक बार अकाल जरुर पड़ता है.

आईये जाने सुन्दर भानगढ़ क्यों बना भूतो का भानगढ़

मेहरानगढ़ किले की वास्तुकला   ( Architecture of Mehrangarh Fort ) :-

राजगढ़ की वास्तुकला बहुत ही अद्भुत और महीन है जिन्हें देखकर लगता है कि इन्हें बनाने में काफी समय लगा होगा किले की वास्तुकला में 20 वीं शताब्दी और 5 वी शताब्दी की वास्तुकला भी देखने को मिलेगी जबकि 500 साल पहले बनाया गया था मेहरानगढ़ का किला मेहरानगढ़ किले की दिवारे 117 फीट लंबी और 68 फीट चौड़ी है इस किले मैं 7 दरवाजे हैं जिसमें से जयपोल सबसे ज्यादा प्रसिद्ध दरवाजा है इसके अलावा मेहरानगढ़ के किले के अंदर और भी प्रसिद्ध महल और बड़े कमरे है जो कि देखने लायक और आकर्षक है जैसे मोती महल (पर्ल पैलेस), फूल महल (रोज पैलेस), शीश महल (ग्लास पैलेस), दौलत खाना,सुरेश खान जैसे कई शानदार शैली से बने कमरे हैं शीश महल जो कि पूरा दर्पण के टुकड़ों पर महीन डिजाइन से बना हुआ है जिस कारण यह पर्यटक को आकर्षक करता है मोती महल जिसका निर्माण राजा सूरत सिंह ने किया था यह भी बहुत आकर्षक है और फूल महल का निर्माण महाराजा अभयसिंह ने करवाया था.

मेहरानगढ़ किले के 7 द्वार (7 Gates of Mehrangarh Fort ) :-

वेसे तो इस मेहरानगढ़ किले में कुल 7 दरवाजे है लेकिन इनमे से कुछ प्रसिद्ध द्वार है जिन का उल्लेख निचे दिया गया है.

जय पोल द्वार इसे विजय द्वार के नाम से भी जाना जाता है इस का निर्माण महाराजा मान सिंह ने 1806 में जयपुर और बीकानेर पर युद्ध से मिली जीत की ख़ुशी में करवाया था.

फतेह पोल इस द्वार का निर्माण मुगलों से मिली जीत की ख़ुशी में करवाया था.

डेढ़ कंग्र पोल द्वार जिसे आज भी तोपों से की जाने वाली बमबारी का डर लगा रहता है.

 लोह पोल द्वार ये किले का अंतिम द्वार है यह द्वार किले में परिसर के मुख्य भाग में बना हुआ है इसके बायीं और 15 रानियो के हाथो के निशान देखने को मिलते है जो की बहुत आकर्षक है इन रानियों ने 1843 में अपने पति महाराजा मान सिंह के अंतिम संस्कार पर खुद को कुर्बान कर दिया था ये हाथो के निशान उन की कुर्बान के प्रतिक है.

मेहरानगढ़ किले का म्यूजियम ( Museum of Mehrangarh Fort ) :-

मेहरानगढ़ किले का यह म्यूजियम राजस्थान के बेहतरीन और सबसे प्रसिद्ध म्यूजियम में से एक है इस म्यूजियम के एक भाग में शाही पालकिया रखी हुयी है जो की बहुत ही सुन्दर है उन पालकियो पर महीन कारीगिरी और कुछ परिया भी बनी हुयी है यह गुंबददार महाडोल पालकी भी राखी हुयी है जिने गुजरात के गवर्नर से युद्ध में 1730 में जीता गया था इस म्यूजियम में हमें सेना की पोशाक चित्र और डेकोरेट कमरे भी देखने को मिलते हैं किले की दीवारों पर तोपे भी रखी हुयी है जो किले की सुन्दरता को चार चाँद लगा रही है.

  मेहरानगढ़ किले के आसपास पर्यटन स्थल( Tourist Places Around Mehrangarh Fort ) :-

अगर आप मेहरानगढ़ किले को देखने के लिए जा रहे हैं तो इसके अंदर और भी सुंदर मंदिर और पार्क बने हुए हैं जो कि आपको जरूर देखनी चाहिए क्योंकि वह बहुत प्रसिद्ध है.

1. चामुंडा माताजी मंदिर :-

इस मंदिर की स्थापना राव जोधा ने की थी  यह उनकी कुलदेवी  है ऐसा माना जाता है कि जब राव जोधा अपनी राजधानी को मंडोर से जोधपुर स्थानांतरित कर रहे थे तो वह अपने साथ अपनी कुलदेवी की मूर्ति भी ले आए थे जिसे उन्होंने एक सुंदर मंदिर बनाकर वहां स्थापित किया जिन्हें चामुंडा माताजी के नाम से जाना जाता है.

2. नागणेचजी मंदिर :-

इस मंदिर की स्थापना चौधरी शताब्दी में की गई थी जोकि किले के दाई और स्थित है जब राव धुहड़ मूर्ति को मारवाड़ में लाए थे तब उनकी स्थापना किले में की गई थी.

3. राव जोधा डिजर्ट रॉक पार्क :-

यह पार्क किले के पास ही है और बहुत ही सुंदर पार्क है और जब आप इसके अंदर एंट्री लेते हैं तो यहां का कॉस्ट ₹100 है और मैं टिकट के साथ आपको मैप भी देते हैं यहां बहुत शांति होती है यह पाक 72 हेक्टेयर के क्षेत्र में फैला हुआ है इस पार्क में आप पर्यटक गाइड के साथ 880 से 1100 मीटर लंबे रोमांचक राशि पर जा सकते हैं और यहां आपको एक छोटा पानी का स्रोत भी देखने को मिलेगा और यहां का रास्ता बहुत पतला और दोनों तरफ पहाड़ों से घिरा हुआ है और यहां आपको कुछ अनोखे पौधे भी देखने को मिलेंगे.

4. चोकेलो गार्डन :-

 इस गार्डन को 18वीं शताब्दी में बनाया गया यह केले के ठीक नीचे स्थित है इस गार्डन में एक रेस्टोरेंट भी है जहां से आपको मनभावन दृश्य दिखाई देगा अगर आप मेहरानगढ़ किला देखने जा रहे हैं तो आपको यहां भी जरूर जाना चाहिए.

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मेहरानगढ़ किले की विशेषता   ( Features of Mehrangarh Fort ) :-

  • यह किला सबसे विशाल और प्रसिद्ध इमारतो में से एक है.
  • यह किला 410 फिट की ऊँची चोटी पर बना हुआ है.
  • इस किले में 7 द्वार है और बहुत ही सुन्दर म्यूजियम है.
  • किले के अंदर बहुत से सुन्दर महल है जेसे- मोती महल, शीश महल, फुल महल आदि और भी है
  • किले के आसपास देखने के लिए और भी सुन्दर मंदिर और पार्क है.

मेहरानगढ़ किले का खुलने का, घूमने का सही समय और प्रवेश  शुल्क :-

यदि आप मेहरानगढ़ घूमने का प्लान बना रहे हैं तो आपको बता दे कि घूमने का सबसे अच्छा समय सर्दियों के मौसम का है अक्टूबर से मार्च के महीनों के बीच का मौसम काफी ठंडा और सुखद रहता है

खुलने का समय :-

  • तो सबको बता दें कि इसमें रामगढ़ का किला है यह सप्ताह भर खुला ही रहता है यह किला सुबह 9:00 बजे से शाम 6:00 बजे तक खुला रहता है
  • अगर इस किले के प्रवेश शुल्क की बात करें तो यदि आप भारतीय नागरिक है तो आपको 200 रुपए देने पढ़ते हैं
  • अगर आप विद्यार्थी है तो आपको ₹100 प्रवेश शुल्क देने पड़ते है
  • यदि अगर आप विदेशी नागरिक है तो आपको ₹600 देने पड़ते हैं
  • अगर आप वहां फोटो और वीडियो बनाते हैं तो उसका अलग टिकट लगता है

प्रवेश शुल्क :-

मेहरानगढ़ के किले में जाने के लिए आपको कुछ शुल्क देने पड़ते हैं जिसके लिस्ट नीचे दी हुई है

जोधपुर का प्रसिद्ध भोजन ( Famous Food of Jodhpur ) :-

  जोधपुर में काफी स्वादिष्ट भोजन बनाया जाता है यहां के भोजन मिर्ची मसाले से भरपूर होते हैं जोधपुर की मखानिया लस्सी भी काफी फेमस है अगर आप मीठे के शौकीन हैं तो आपको भोग बेसन की चक्की, मावे की कचोरी, मोतीचूर के लड्डू और मक्खन बड़े जरूर खाने चाहिए अगर आप स्ट्रीट फूड के शौकीन है तो आपको मिर्ची बड़ा, मावा कचोरी और प्याज कचोरी जैसे स्वादिष्ट स्ट्रीट फुट है तो आपको जरूर इनका मजा लेना चाहिए.

मेहरानगढ़ किले तक कैसे पहुंचे ( How to reach Mehrangarh Fort ) :-

अगर आप जोधपुर या मेहरानगढ़ किले में जाना चाहते हैं तो आप कई साधनों से जा सकते हैं जैसे रेल सड़क हवाई जहाज से भी आप जा सकते हैं क्योंकि जोधपुर शहर भारत के सभी प्रमुख शहरों के साथ नेटवर्क से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है.

ट्रेन से मेहरानगढ़ किले तक कैसे पहुंचे :-

जोधपुर रोज कई ट्रेनें आती है अगर आप यहां के निकटतम रेलवे स्टेशन राय का बाग रेलवे स्टेशन है तो वहां से मेहरानगढ़ किला लगभग 600 किलोमीटर है जहां से आप टैक्सी या कैब की मदद से आ सकते हैं.

हवाई जहाज से मेहरानगढ़ किले तक कैसे पहुंचे :-

जोधपुर का एक हवाई अड्डा जो कि अब अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा बन चुका है आप यहां तक आसानी से पहुंच सकते हैं और यहां आने के बाद मेहरानगढ़ किले तक आप किसी टैक्सी या अन्य वाहनों की मदद ले सकते हैं.

सड़क मार्ग से मेहरानगढ़ किले तक कैसे पहुंचे :-

राजस्थान सरकार द्वारा कई बसें चलाई गई है इसके अलावा आप अपनी निजी साधन से भी यहां पर आ सकते हैं.

मेहरानगढ़ किले तक पहुंचेने का मेप :-

सवाल जवाब ( Question answer ) :-

  • मेहरानगढ़ किला कहाँ स्थित है

          मेहरानगढ़ किला जोधपुर में स्थित है |

  • मेहरानगढ़ किले का निर्माण किसने किया

         मेहरानगढ़ किले का निर्माण जोधपुर के राजा राव जोधा ने करवाया था |

  • मेहरानगढ़ किले की स्थापना कब हुआ था

         मेहरानगढ़ किले की स्थापना सन 1459 में हुआ था |

  • मेहरानगढ़ किले के अंतिम राजा के अंतिम राजा कोन थे

         मेहरानगढ़ किले के अंतिम राजा गज सिंह राठोड़  थे |

  • क्या यह मेहरानगढ़ किला covid के समय भी खुला हुआ है

जी हाँ यह किया खुला हुआ है लेकिन आप covid के सारे रूल फोलो करे ताकि आप भी सुरक्षित रहे और दुसरे भी |

  • मेहरानगढ़ का किला कोन सी पहाड़ी पर स्थित है

         मेहरानगढ़ का किला चिड़ियाटंक पहाड़ी पर स्थित है |

  • मेहरानगढ़ किला पर्यटको के लिए कितने बजे खुलता और बंद होता है

         मेहरानगढ़ किला सुबह 9 बजे खुलता है शाम को 6 बजे बंद होता है |

  • भारत का सबसे शापित महल के नाम से किसे जाना जाता है

         मेहरानगढ़ किले को भारत का सबसे शापित महल माना जाता है |

सबसे महत्वपूर्ण बातें ( Most important topic ) :-

दोस्तों ये एतिहासिक इमारतो, महलो और पर्यटक स्थलों पर यात्रा अवधि टिकट के पैसे जैसे छोटी चीजें बदलती रहती है

यदि अगर आप को इनके बारे में पता है तो आप कमेंट में जरुर लिखे हम आप के द्वारा दी गयी जानकारी जल्द ही अपडेट कर देंगे और यदि इस पोस्ट में हम से कोई गलती हो गयी है तो वो भी जरुर बताये|

धन्यवाद  

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The story of Mehrangarh Fort and its curse

Resham Sengar Resham Sengar / Times Travel Editor / TRAVEL TRENDS , JODHPUR / Created : Feb 13, 2019, 17:35 IST

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​Beneath the foundations of Mehrangarh Fort in Jodhpur lies the grave of a man who died to nullify a serious curse

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The story of Mehrangarh Fort and its curse

एक शापित किला मेहरानगढ़ किला | Mehrangarh fort Rajasthan

Mehrangarh fort Rajasthan | एक शापित किला मेहरानगढ़ किला

राजस्थान अपने शाही महलों और किलो के माध्यम से पर्यटकों के मन में बस चूका है। यहाँ पर एक से बढ़कर एक किले और महल मौजूद है जो उस दौर की गाथा सुनाते है।

इन महलो और किलों को इतनी खूबसूरती और सूझबूझ से बनाया गया था की आज भी ये उसी प्रकार से मजबूती के साथ खड़ी है जिस प्रकार से उस ज़माने के राजाओं ने निर्माण किया था।

यह वह दौर था जब राजे-महराजे अपनी प्रजा को सबकुछ मानते थे उनकी सुरक्षा के लिए हरसंभव प्रयास किया करते थे।

अपनी एवं प्रजा की सुरक्षा के लिए पहाड़ों या ऊँचे स्थानों पर किले या महल का निर्माण किया करते थे ताकि दुश्मन को दूर से ही देखकर आगे की रणनीति बनाकर उन्हें हराया जा सके।

तो दोस्तों आज हम चलने वाले है राजस्थान के एक और नगीने यानी मेहरानगढ़ किला के दर्शन करने, उम्मीद है आप सभी को यह यात्रा बेहद पसंद आएगा।

Table of Contents

1. मेहरानगढ़ किला कहाँ पर स्थित है ? [Mehrangadh fort in hindi]

मेहरानगढ़ किला राजस्थान के जोधपुर में स्थित है। शुरुआत में इस किले का नाम था मिहिरगढ़, मिहिर का शाब्दिक अर्थ होता है सूर्य और गढ़ का अर्थ होता है किला या दुर्ग।

इसीलिए इस किले को सूर्य का किला भी कहा जाता है।

यह किला काफी विशाल है और इस प्रकार का किला, उस समय बनाना लगभग असम्भब था।

लेकिन इस सुदृण किले का निर्माण न सिर्फ करवाया बल्कि उससे अपने प्रजा को भी बाहरी अक्रान्ताओ या आक्रमणकारियों से भी बचाये रखा।

Mehrangarh fort Rajasthan | एक शापित किला मेहरानगढ़ किला

इस किले में प्रवेश के लिए 8 द्वारा है और अनगिनत बुर्जे है। इन बुर्जों से ही सेना दुश्मनो पर गोले दागती थी।

कुल मिलकर यह किला लगभग 9 से 10 किमी लम्बी और ऊँची दीवारों से लैस है और अभेद्य भी।

इस किले की बनावट इस प्रकार से की गयी थी की दुश्मन देश की सेना किसी भी सूरत में प्रवेश ना कर पाए।

इस किले के अंदर ही संग्रहालय स्थापित किया गया है और कई दुकाने भी सजाकर रखी गयी है।

आने जाने वाले पर्यटकों के लिए जगह-जगह पर संगीतकार, राजस्थानी गीत गाते रहते है जिसे राजस्थानी परिवेश और परंपरा के बारे में लोगों को जानकारी प्राप्त करने के साथ-साथ पर्यटकों का मनोरजन होता रहे।

2. मेहरानगढ़ किले का इतिहास [ Mehrangarh fort history]

मेहरानगढ किला का निर्माण जोधपुर के राजा राव जोधा ने करवाया था, उनके पिता का नाम था राजा रणमल था। राव जोधा अपने पिता की 24 वि संतान थे।

राजा राव जोधा जब जोधपुर के राजा बने तब उनके सामने अपने साम्राज्य को बढ़ने के साथ साथ उसे सुदृण बनाये रखने के लिए एक नए किले की आवश्यकता जान पड़ी।

इसके लिए उन्होंने एक पहाड़ी जिसे भोर चिड़ियाटुंक के नाम से भी जाना जाता था।

इस किले के निर्माण के लिए राजा राव जोधा जी ने 12 मई 1459 को इसी पहाड़ी पर इसकी नीव रखी। इसे किले को पूरी तरह विकसित करने का श्रेय महाराज जसवंत सिंह को जाता है।

इसे जरूर पढ़ें-   जाने जैसलमेर किले का इतिहास

2.1 राव जोधा कौन थे ? [Who was Raav jodha ]

राठौर वंश के प्रतापी शासकों में से एक थे राव जोधा । इनके पिता का नाम राव रणमल था। आप इनकी वीरता का अनुमान इस प्रकार से लगा सकते है की जब राव जोधा जी राजगद्दी पर बैठ तो उसके कुछ समय पश्चात यानी वर्ष 1453 में मण्डौर पर आक्रमण करके उसे जीत लिया।

यह उनकी विजय की पहली शुरुआत थी। इसके बाद उन्होंने मेड़ता, फलोदी, पोखरण, भादरजन, सोजात, जायतारन, सिवा, सिवान,गोडवाड़ जैसी इलाकों को अपने अधीन कर लिया था।

वर्ष 1459 में इन्होने जोधपुर नामक एक नया नगर की स्थापना की और इसके साथ ही चिडियाटूक नामक पहाड़ी पर सुरक्षा करने को ध्यान में रखते हुए मेहरानगढ़ दुर्ग का निर्माण करवाया था।

राव जोधा जी के पश्चात राजगद्दी पर उनके उत्तराधिकारी राव सातल, राव सुजा तथा राव गंगा मारवाड़ के शासक बने।

3. मेहरानगढ़ किले की स्थापत्य कला [ Mehrangarh fort architecture]

यह किला लाल बलुआ पत्थर से निर्मित किया गया है और तो और इसे बनाने के लिए महीन कलाकारी की गयी है। मेहरानगढ़ किला एक वास्तुशिल्प चमत्कार है।

mehrangarh fort haunted in hindi

यह किला अपनी सीमाओं की रक्षा करने वाले शहर के ताज के रूप में खड़ा है।

एक प्रसिद्ध कहावत है कि मारवाड़ के लोग किले को देखे बिना दिन की शुरुआत भी नहीं कर सकते।

यह किला सबसे अधिक फोटो खिंचवाने वाले किले में से एक है।

इस किले के अंदर कई सुंदर महल स्थापित है जैसे-

  • दौलत खाना , इत्यादि

4. जोधपुर के अन्य पर्यटन स्थल [Tourist place in jodhpur]

दोस्तों यूँ तो पूरा राजस्थान ही एक पर्यटन स्थल के रूप में प्रसिद्ध है।

लेकिन चूँकि आज हम बात कर रहे है जोधपुर जिले की तो यदि आप जोधपुर आये है तो यहाँ के अन्य पर्यटन स्थलों को जरूर जाने।

  • उमेद भवन पैलेस
  • मेहरानगढ़ किला
  • राव जोधा डेजर्ट पार्क
  • मंडोर गार्डन

5. मेहरानगढ़ किले के खुलने का समय और प्रवेश शुल्क [Mehrangarh fort opening time & Ticket price]

मेहरानगढ़ किला पुरे सप्ताह खुला रहता है। हालाँकि खुश विशेष छुट्टियों के समय में ही यह किला बंद रहता है।

5.1 खुलने का समय

दोस्तों मेहरानगढ़ का किला सप्ताह भर खुला रहता है। यह किला सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे से तक खुला रहता है।

वही इस किले में प्रवेश शुल्क की बात करें तो यदि आप भारतीय नागरिक है तो आपको 200 रूपये देने पड़ते है।

यदि आप एक विद्यार्थी है तो आपको 100 रूपये प्रवेश शुल्क देने पड़ते है।

वही आप विदेशी नागरिक है तो आपको 600 रूपये देने पड़ते है।

वही इस किले में आप फोटो और वीडियो ले सकते है इसके लिए कुछ अलग से टिकट लगता है।

5.2 प्रवेश शुल्क

इस किले में प्रवेश के लिए विभिन्न प्रकार के शुल्क लिए जाते है। इन प्रवेश शुल्क की लिस्ट इस प्रकार है-

6. परिवहन सुविधा [How to reach meharangarh fort]

7. सवाल जवाब [faq].

दोस्तों आप सभी के द्वारा मेहरानगढ़ किला के बारे में कुछ सवाल पूछे गए है। जिनमे से कुछ को हमने इस आर्टिकल में सबमिट किया है।

उम्मीद है हमारे द्वारा दिए गए जवाबों से आप सभी संतुष्ट हो पाएंगे।

अगर फिर भी आपके मन में इस जगह से लेकर कोई भी क्वेरी हो तो कमेंट में जरूर बताएं।

मेहरानगढ के किले का निर्माण जोधपुर के राजा राव जोधा ने करवाया था

मेहरानगढ़ का किला सुबह 9 बजे खुलता है और शाम को शाम 6 बजे बंद होता है

जी हाँ यह किला खुला हुआ है लेल्किन आप अपनी सेहत का ख्याल जरूर रखें. और हाँ सबसे जरुरी बात कोविद प्रोटोकॉल जरूर फॉलो करें ताकि आप भी सुरक्षित रहे और दूसरे भी.

मेहरानगढ़ किले में अंतिम समय राजा गज सिंह राठौर जी ने बिताया था.

मेहरानगढ़ किले का निर्माण वर्ष 1459 में राव जोधा जी ने करवाया था.

भारत में मेहरनगढ़ के महल को एक शापित किला माना जाता है।

8. मेहरानगढ़ किले की तस्वीर [Mehrangarh fort image]

mehrangarh fort haunted in hindi

9. निष्कर्ष [Conclusion]

मेहरानगढ़ किला अपने समय का अभेद्य किला था। इसी प्रकार का एक किला नाहरगढ़ का किला था जिसे किसी भी देश के राजा नहीं जीत पाए थे।

यह किला लगभग 9 से 10 किमी लम्बी और ऊँची दीवारों से लैस है और अभेद्य भी है।

एक शापित किला मेहरानगढ़ किला | Mehrangarh fort Rajasthan

दोस्तों यदि आप एक इतिहास के विद्यार्थी है या फिर अपने देश के बारे में जानना चाहते है , राजाओ के बारे में जानना चाहते है तो मेरा सुझाव है की इन जगहों पर जरूर जाएँ।

ये जगहें न सिर्फ आपका मनोरजन करेंगी बल्कि आप इन जगहों के बारे में जानकर प्राचीन राजाओं उनकी युद्धनीति और राजनीती से संबधित कितनी ही बातो को जान पाएंगे।

9. मेहरानगढ़ फोर्ट की लोकेशन [Meharangarh fort location, map]

10. सबसे महत्वपूर्ण बात [Most important thing]

दोस्तों इन ऐतिहासिक इमारतों या पर्यटन स्थलों पर टिकट के पैसा, यात्रा अवधी जैसे छोटी चीज़ें बदलती रहती है।

इसलिए यदि आपको इनके बारे में पता है तो जरूर कमेंट में जरूर बताएं हम जल्द ही आपके द्वारा दी गयी जानकारी को अपडेट कर देंगे।

यदि इस पोस्ट में कुछ गलती रह गयी हो तो उसे कमेंट में जरूर बताएं।

2 thoughts on “एक शापित किला मेहरानगढ़ किला | Mehrangarh fort Rajasthan”

Me abhi 27 /09/2021 ko meharangarh fort me ghoomne gya tha ab 120 se badha kar doso rupay fees kar di gyi he indian ke liye or student ke liye 100 rupay

इस जानकारी के लिए धन्यवाद ! अतुल जी, हमने इस आर्टिकल में आपके द्वारा बताये गए प्रवेश शुल्क के बारे में अपडेट कर दिया है।

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भारत के 8 सबसे डरावने किले जिनके रहस्य से आज तक नहीं उठा पर्दा

श्वेता चौहान

Credit: Instagram/janhvikapoor

भानगढ़ का किला, राजस्थान

अलवर की राजकुमारी रत्नावती ने इस किले को बनवाया था, यह सबसे डरावनी जगहों में से एक है जिसके पीछे कई सारी डरावनी और रहस्यमयी कहानियां जुड़ी हुई है। ASI की गाइडलाइन्स के अनुसार यहां सूरज ढलने के बाद जाना मना है।

Credit: iStock

गोलकुंडा किला, हैदराबाद

काकतीय राजवंश ने यहां सबसे लंबे समय तक शासन किया। ऐसा माना जाता है कि राजा और रानी, ​​जिन्हें यहां दफनाया गया था, अभी भी किले में रहते हैं, और एक नाचने वाली वेश्या अभी भी महल में रात में नाचती है।

फ़िरोज़ शाह कोटला, नई दिल्ली

इस जगह को जिन्नों के घर कहा जाता है, यहां के स्थानीय लोगों की मानें तो जिन्न रात में यहां अनजान औरतों और बच्चों का शिकार करते हैं। हर गुरुवार को लोग यहां प्रार्थना भी करने आते हैं।

नाहरगढ़ का किला, जयपुर

यह किला अरावली पर्वत शृंखला की तलहटी में मौजूद है। ऐसा माना जाता है कि महाराजा सवाई मानसिंह की आत्मा अभी भी वहां रहती है।

Credit: Pexels

सज्जनगढ़ किला, उदयपुर

इस किले को मानसून पैलेस भी कहते है, माना जाता है कि यह किला भूतिया है, यहां के सभी कमरे बंद हैं। शाम 7 बजे के बाद किसी भी टूरिस्ट को किले के अंदर जाने की परमिशन नहीं है।

ऊपरकोट किला, गुजरात

यह किला जूनागढ़ शहर के बीच में स्थित है। इसमें जामा मस्जिद है, और मस्जिद के आसपास के क्षेत्र काफी डरावना माना जाता है।

शनिवार वाड़ा किला, पुणे

यह जगह काफी लंबे समय से मराठा पेशवाओं का घर रहा है। ऐसा कहा जाता है कि पुणे के पांचवें पेशवा नारायण राव पर उनके रक्षकों ने हमला किया था और मदद के लिए उनकी पुकार आज तक यहां गूंजती है।

मेहरानगढ़ किला, जोधपुर

राजपूत शासक राव जोधा ने इसे बनवाया था जो सबसे बड़े किलों में से एक है, इस किले के बारे में कहते हैं कि यहां एक युवक की आत्मा रहती है जिसे राव ने आग लगा दी थी।

'हिंदुस्तान के दिल' मध्य प्रदेश के इन फोर्ट्स को नहीं देखा तो क्या ही देखा!

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मेहरानगढ़ किले का इतिहास और घूमने की जानकारी – Information About The History Of Mehrangarh Fort In Hindi

Mehrangarh Fort In Hindi : मेहरानगढ़ किला जिसको मेहरान किले के रूप में भी जाना जाता है। इस किले को 1459 में राव जोधा द्वारा जोधपुर में में बनवाया गया था। यह किला देश के सबसे बड़े किलों में से एक है और 410 फीट ऊंची पहाड़ी की चोटी पर स्थित है। मेहरानगढ़ किला विशाल दीवारों द्वारा संरक्षित है जहां पर कई तरह की हॉलीवुड और बॉलीवुड की शूटिंग हुई है जिनमे द लायन किंग, द डार्क नाइट राइज और ठग्स ऑफ हिंदोस्तान के नाम शामिल हैं। इस किले का प्रवेश द्वारा एक पहाड़ी के ऊपर है जो बेहद शाही है। किले में सात द्वार हैं जिनमें विक्ट्री गेट, फतेह गेट, भैरों गेट, डेढ़ कामग्रा गेट, फतेह गेट, मार्टी गेट और लोहा गेट के नाम शामिल है।

इस सभी गेटों का निर्माण अलग-अलग समय में किया गया था और इन्हें एक विशिष्ट उद्देश्य के चलते बनाया गया था। यहां पर जयपुर और बीकानेर सेनाओं पर महाराजा मान सिंह की जीत के उपलक्ष्य में विजय द्वार का निर्माण भी किया गया था। इसके अलावा किले में शीश महल (ग्लास पैलेस) और फूल महल (रोज पैलेस) जैसे आकर्षक महल भी हैं। अगर आप मेहरानगढ़ किले को देखने के लिए जाना चाहते हैं तो इस लेख को जरुर पढ़ें, इसमें हम आपको किले के बारे खास बातें जैसे मेहरानगढ़ किले का इतिहास, वास्तुकला, आसपास के पर्यटन स्थल और घूमने के बारे में जानकारी दे रहे हैं।

मेहरानगढ़ किले का इतिहास – Mehrangarh Fort History In Hindi

मेहरानगढ़ किले की वास्तुकला – Architecture Of The Fort In Hindi

मेहरानगढ़ किले के आसपास पर्यटन – Sightseeing Around Mehrangarh Fort In Hindi

  • चामुंडा माताजी मंदिर – Chamunda Mataji Temple In Hindi
  • नागणेचजी मंदिर – Nagnechji Temple In Hindi
  • राव जोधा डेजर्ट रॉक पार्क – Rao Jodha Desert Rock Park In Hindi
  • चोकेलो गार्डन – Chokelao Garden In Hindi

मेहरानगढ़ फोर्ट की विशेषता – Mehrangarh Fort Facts in Hindi

मेहरानगढ़ किले का दौरा करने का सबसे अच्छा समय- Best Time To Visit Mehrangarh Fort In Hindi

जोधपुर में स्थानीय भोजन और रेस्तरां – Local Food And Restaurants In Jodhpur In Hindi

मेहरानगढ़ किले के पास रेस्टोरेंट – Restaurants Near Mehrangarh Fort In Hindi

मेहरानगढ़ किले तक कैसे पहुँचे – How To Reach Mehrangarh Fort In Hindi

  • ट्रेन से मेहरानगढ़ किले तक कैसे पहुँचे – How To Reach Mehrangarh Fort By Train In Hindi
  • हवाई जहाज से मेहरानगढ़ किले तक कैसे पहुँचे – How To Reach Mehrangarh Fort By Airplane In Hindi
  • सड़क मार्ग से मेहरानगढ़ किले तक कैसे पहुँचे – How To Reach Mehrangarh Fort By Road In Hindi

मेहरानगढ़ किले की लोकेशन का मैप – Mehrangarh Fort Location

मेहरानगढ़ किले की फोटो गैलरी – Mehrangarh Fort Images

1. मेहरानगढ़ किले का इतिहास – Mehrangarh Fort History In Hindi

मेहरानगढ़ किले का इतिहास - Mehrangarh Fort History In Hindi

मेहरानगढ़ किले का इतिहास काफी दिलचस्प है जो हमें उस समय में वापस ले जाता है जब 15 वीं शताब्दी का दौरान राठौर शासक राव जोधा ने 1459 में जोधपुर की स्थापना की थी। राजा राम मल के पुत्र राव जोधा ने शहर को मंडोर से शासित किया लेकिन फिर उसने अपनी राजधानी को जोधपुर स्थानांतरित कर दिया था। इसके बाद उन्होंने भाऊचेरिया पहाड़ी पर किले की नीव रखी जिसकी दूरी मंडोर से सिर्फ 9 किमी थी। ‘मेहरान’ का अर्थ सूर्य है इसलिए राठोरों ने अपने मुख्य देवता सूर्य के नाम से इस किले को मेहरानगढ़ किले के रूप में नामित किया। इस किले के मुख्य निर्माण के बाद जोधपुर के अन्य शासकों मालदेव महाराजा, अजीत सिंह महाराजा, तखत सिंह और महाराजा हनवंत सिंह द्वारा इस किले में अन्य निर्माण किए।

2. मेहरानगढ़ किले की वास्तुकला – Architecture Of The Fort In Hindi

मेहरानगढ़ किले की वास्तुकला - Architecture Of The Fort In Hindi

मेहरानगढ़ किले और महलों को 500 साल की अवधि में बनाया गया था। किले की वास्तुकला में आप 20 वीं शताब्दी की वास्तुकला की विशेषताओं के साथ 5 वीं शताब्दी की बुनियादी वास्तुकला शैली को भी देख सकते हैं। किले में 68 फीट चौड़ी और 117 फीट लंबी दीवारें है। मेहरानगढ़ किले में सात द्वार हैं जिनमें से जयपोली सबसे ज्यादा लोकप्रिय है। किले की वास्तुकला 500 वर्षों की अवधि के विकास से गुजरी है। महाराजा अजीत सिंह के शासन के समय इस किले की कई इमारतों का निर्माण मुगल डिजाइन में किया गया है। इस किले में पर्यटकों को आकर्षित कर देने वाले सात द्वारों के अलावा मोती महल (पर्ल पैलेस), फूल महल (फूल महल), दौलत खाना, शीश महल (दर्पण पैलेस) और सुरेश खान जैसे कई शानदार शैली में बने कमरें हैं। मोती महल का निर्माण राजा सूर सिंह द्वारा बनवाया गया था। शीश महल, या हॉल ऑफ मिरर्स बेहद आकर्षक है जो अपनी दर्पण के टुकड़ों पर जटिल डिजाइन की वजह से पर्यटकों के आकर्षण का मुख्य केंद्र है। फूल महल का निर्माण महाराजा अभय सिंह ने करवाया था।

और पढ़े:  जूनागढ़ किला जाने की पूरी जानकारी

3. मेहरानगढ़ किले के आसपास पर्यटन – Sightseeing Around Mehrangarh Fort In Hindi

अगर आप मेहरानगढ़ किले की सैर करने जा रहे हैं तो आपको बता दें कि इस किले के अंदर कुछ मंदिर और पार्क भी बने हुए है जहां आपको किले की यात्रा के दौरान जरुर जाना चाहिए।

3.1 चामुंडा माताजी मंदिर – Chamunda Mataji Temple In Hindi

चामुंडा माताजी मंदिर - Chamunda Mataji Temple In Hindi

जब राव जोधा अपनी अपनी राजधानी को मंडोर से जोधपुर स्थानांतरित किया था तब वह अपने साथ दुर्गा माता की मूर्ति को भी ले गए थे। इस मूर्ति को मेहरानगढ़ किले में स्थापित किया गया था जिसे आज चामुंडा माता मंदिर के नाम से जाना जाता है।

3.2 नागणेचजी मंदिर – Nagnechi Temple In Hindi

नागणेचजी मंदिर - Nagnechi Temple In Hindi

नागणेचजी मंदिर किले के बिलकुल दाईं ओर स्थित है जिसका निर्माण 14 वीं शताब्दी में किया गया था, जब राव धुहड़ ने मूर्ति को मारवाड़ में लाया था जिसको बाद में किले में स्थापित कर दिया गया था।

3.3 राव जोधा डेजर्ट रॉक पार्क – Rao Jodha Desert Rock Park In Hindi

राव जोधा डेजर्ट रॉक पार्क - Rao Jodha Desert Rock Park In Hindi

राव जोधा डेजर्ट रॉक पार्क किले के पास स्थित है जो प्रकृति प्रेमियों के लिए स्वर्ग के सामान है। यह पार्क 72 हेक्टेयर के क्षेत्र में फैला हुआ है जहां रेगिस्तान और शुष्क वनस्पति पाई जाती है। इस पार्क में पर्यटक गाइड के साथ 880 से 1100 मीटर लंबे रोमांचक रास्ते जा सकते हैं जहां पर कुछ अनोखे पौधों को देखा जा सकता है।

3.4 चोकेलो गार्डन – Chokelao Garden In Hindi

चोकेलो गार्डन - Chokelao Garden In Hindi

चोकेलो गार्डन मेहरानगढ़ किले के ठीक नीचे स्थित है जिसे आपको अपनी किले की यात्रा में जरुर शामिल करना चाहिए। यह गार्डन 18 वीं शताब्दी का है जिसके बाद इसका जीर्णोद्धार किया गया है। इस गार्डन में एक रेस्टोरेंट भी है जहां से आप मनोरम दृश्य का आनंद लिया जा सकता है।

4. मेहरानगढ़ फोर्ट की विशेषता – Mehrangarh Fort Facts in Hindi

मेहरानगढ़ फोर्ट की विशेषता - Mehrangarh Fort Facts in Hindi

  • मेहरानगढ़ किला राजस्थान के सबसे बड़े, संरक्षित और सबसे प्रभावशाली स्मारकों में से एक है।
  • यह किला एक लंबवत चट्टान पर बना हुआ है और यह लगभग चार सौ फीट की ऊंचाई पर स्थित है।
  • किले के निर्माण के लिए राव जोधा को एक ऋषि चीरिया नाथजी को जबरदस्ती इस जगह से हटाया था जिसके बाद उस ऋषि ने राजा को शाप दिया था कि इस किले को पानी की कमी का सामना करना पड़ेगा। लेकिन बाद में राव जोधा ने उनके लिए एक मंदिर और एक घर बनवाकर उन्हें प्रसन्न किया।
  • जब आप इस किले को देखने के लिए जायेंगे तो इसके मुख्य द्वार के सामने आपको कुछ लोग लोक नृत्य करते नजर आयेंगे।
  • कई हॉलीवुड और बॉलीवुड फिल्मों को किले में शूट किया गया है जिसमें फिल्म द डार्क नाइट राइजेस का नाम भी शामिल है।

और पढ़े:  आमेर किले का इतिहास और घूमने की जानकारी

5. मेहरानगढ़ किले का दौरा करने का सबसे अच्छा समय- Best Time To Visit Mehrangarh Fort In Hindi

मेहरानगढ़ किले का दौरा करने का सबसे अच्छा समय- Best Time To Visit Mehrangarh Fort In Hindi

अगर आप मेहरानगढ़ किले की यात्रा करने की योजना बना रहे हैं तो आपको बता दें कि यहां जाने का सबसे अच्छा समय सर्दियों के मौसम का है। अक्टूबर से मार्च के के महीनों के बीच यहां का मौसम काफी ठंडा और सुखद रहता है। इस मौसम में आप पूरे किले को एक्सप्लोर कर सकते हैं। किला घूमने के लिए आप सर्दियों के मौसम में सुबह के समय जाएँ। यह किला सुबह 9:00 बजे पर्यटकों के लिए खोला जाता। आप दो या तीन घंटे एक किले में बिताने के बाद यहां के पास के पर्यटन स्थलों पर जा सकते हैं।

6. जोधपुर में स्थानीय भोजन और रेस्तरां – Local Food And Restaurants In Jodhpur In Hindi

जोधपुर में स्थानीय भोजन और रेस्तरां - Local Food And Restaurants In Jodhpur In Hindi

जोधपुर एक ऐसा शहर है जहां के व्यंजन मिर्च मसाले से भरपूर होते हैं। यहां पर पर्याप्त मात्रा में स्ट्रीट फूड और मिठाइयां उपलब्ध हैं। यहां आप मिर्ची बड़ा, मावा कचोरी और प्याज़ कचोरी जैसे कुछ स्वादिष्ट स्ट्रीट फूड का स्वाद भी ले सकते हैं इसके अलावा यहां के मखानिया लस्सी भी काफी लोकप्रिय है। अगर आप इस शहर में कुछ मीठा खाना चाहते हैं तो यहां मिलने वाले भोग बेसन की चक्की, मावे की कचौरी, मोतीचूर के लड्डू और मखान वडे का मजा भी ले सकते हैं।

7. मेहरानगढ़ किले के पास रेस्टोरेंट – Restaurants Near Mehrangarh Fort In Hindi

मेहरानगढ़ किले के पास कई रेस्तरां और कैफे स्थित हैं जो आपको राजस्थानी व्यंजनों का आनंद देते हैं। जिसमें मेहरान टेरेस, केसर हेरिटेज रेस्तरां आदि के नाम शामिल हैं।

और पढ़े:  जयगढ़ किले का इतिहास और रहस्य

8. मेहरानगढ़ किले तक कैसे पहुँचे – How To Reach Mehrangarh Fort In Hindi

जोधपुर शहर भारत के सभी प्रमुख शहरों के साथ रेल, सड़क और हवाई नेटवर्क से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है इसीलिए पर्यटक इनमे से किसी से ट्रेवल करके आसानी से मेहरानगढ़ किला जा सकते है –

8.1 ट्रेन से मेहरानगढ़ किले तक कैसे पहुँचे – How To Reach Mehrangarh Fort By Train In Hindi

ट्रेन से मेहरानगढ़ किले तक कैसे पहुँचे - How To Reach Mehrangarh Fort By Train In Hindi

अगर आप मेहरानगढ़ किले या जोधपुर की यात्रा रेल द्वारा करना चाहते हैं तो बता दें कि जोधपुर रेलवे स्टेशन सभी प्रमुख भारतीय शहरों से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है और यहां रोज कई ट्रेनें उपलब्ध हैं। इसके अलावा यहां का निकटतम रेलवे स्टेशन ‘राय का बाग’ रेलवे स्टेशन है। जोधपुर रेलवे स्टेशन से मेहरानगढ़ किले की दूरी लगभग 6 किलोमीटर है, जहां आप टैक्सी या कैब की मदद से पहुंच सकते हैं।

8.2 हवाई जहाज से मेहरानगढ़ किले तक कैसे पहुँचे – How To Reach Mehrangarh Fort By Airplane In Hindi

हवाई जहाज से मेहरानगढ़ किले तक कैसे पहुँचे - How To Reach Mehrangarh Fort By Airplane In Hindi

राजस्थान के प्रमुख हवाई अड्डों में से एक, जोधपुर अब एक अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे में तब्दील हो रहा है। यहां के लिए आपको देश के विभिन्न शहरों से दैनिक उड़ानें मिल जायेंगी। इस एयरपोर्ट पर उतरने के बाद आप एक टेक्सी बुक करके या अन्य स्थानीय वाहनों की मदद से मेहरानगढ़ किला जा सकते है।

8.3 सड़क मार्ग से मेहरानगढ़ किले तक कैसे पहुँचे – How To Reach Mehrangarh Fort By Road In Hindi

सड़क मार्ग से मेहरानगढ़ किले तक कैसे पहुँचे - How To Reach Mehrangarh Fort By Road In Hindi

जोधपुर शहर राजस्थान के सभी महत्वपूर्ण शहरों के साथ ही अपने पड़ोसी राज्यों के लिए सड़क मार्ग से जुड़ा हुआ है। यहां पर कई डीलक्स और एक्सप्रेस बस सेवाएं उपलब्ध हैं। अगर आप शहर की यात्रा करना चाहते हैं तो ऑटो रिक्शा, बस, साइकिल रिक्शा या कैब की मदद ले सकते हैं।

और पढ़े:  नाहरगढ़ किले का इतिहास और घूमने की जानकारी

इस आर्टिकल आपने मेहरानगढ़ किले का इतिहास, रहस्य और इसकी यात्रा से जुड़ी पूरी जानकारी को विस्तार से जाना है आपको यह आर्टिकल केसा लगा हमे कमेंट्स में जरूर बतायें।

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9. मेहरानगढ़ किले की लोकेशन का मैप – Mehrangarh Fort Location

10. मेहरानगढ़ किले की फोटो गैलरी – Mehrangarh Fort Images

  • बीकानेर घूमने की जानकारी और टॉप 20 दर्शनीय स्थल 
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Thrilling Travel

The Mehrangarh fort haunted story & facts – 10 reasons to visit this Jodhpur fort

It isn’t just history buffs like me who are enticed to visit the mesmerizing Mehrangarh fort. Anyone who has stumbled upon the astonishing facts about Mehrangarh fort in Jodhpur will be tempted to experience the place firsthand. The Mehrangarh fort story ranges from bone-chilling tales of murder & self-immolation to hair-raising facts related to its construction and architecture. Of course, there is that bit about an age-old Mehrangarh fort curse – one that the King tried to appease ( another tale there! ).

Discover the stories and facts about Mehrangarh fort

This post is a collection of 10 interesting facts about Mehrangarh fort and its stories . As you read through them, you will find the answer to the question – Why should you visit Mehrangarh fort in Rajasthan? So, lets begin –

  • 1 1. The Mehrangarh fort curse
  • 2 2. The Mehrangarh fort story of human sacrifice
  • 3 3. Do you know how big the Mehrangarh fort is?
  • 4 4. How long did it take to construct the Mehrangarh fort? – an astonishing Mehrangarh fort fact?
  • 5 5. The land on which Mehrangarh fort stands has now been classified as a National geological monument
  • 6 6. Mehrangarh fort haunted tales – murders & deaths
  • 7 7. The story of mass self-immolation in Mehrangarh Fort
  • 8 8. Epic location for epic movies
  • 9 9. Mehrangarh fort is a hub for cultural & folk art
  • 10 10. Why is the blue city of Jodhpur also, called the Sun city?
  • 11 Booking Resources

1. The Mehrangarh fort curse

Prior to Mehrangarh, the Rathore clan ruled from Mandore . However, the increased attacks prompted Maharaja Rao Jodha to consider moving his capital to a new location. That is when he chose the rocky hill called Bakurcheeria that overlooked Jodhpur as the ideal site for his new palace. The area was inhabited by one hermit called Cheeria Nathji  (Lord of birds). When the Maharaja approached him to vacate the area, he refused.

Built on a a cliff called Bakurcheeria, the fort was cursed by the lone occupant of the cliff.

When various attempts failed, the Maharaja sought the help of Karni Mataji (a divine warrior Lord) and that finally did the trick. Cheeria Nathji agreed to move but not before laying a curse on Mehrangarh fort . He told the Maharaja that his land will always suffer from scarcity of water.

It turned out that Jodhpur was prone to droughts. Many locals still attribute this to the age-old Mehrangarh fort curse of Cheeria Nathji while some just believe in a rational explanation.

2. The Mehrangarh fort story of human sacrifice

Though the Maharaja sought to appease the hurt hermit by providing him with a home and a temple close to Mehrangarh fort, the effect of the curse could not be undone. Many priests and wise men suggested a human sacrifice be made to reduce the strength of this curse.

The spot of human sacrifice done before building Mehrangarh Fort

One of the residents – Rajaram Meghwal came forward and voluntarily offered to be the sacrifice. His only condition was that his family was to be provided for eternity. He was thus, buried alive before the construction of this Jodhpur fort.

This is the gruesome Mehrangarh fort story of human sacrifice – which remains mortalized by way of a small tablet honoring Raja Ram Meghwal . You will find this just after you enter the Dedh Kangra Pol . And true to his word, the descendants of his Rajaram Meghawal are still supported by the Rathore trust.

3. Do you know how big the Mehrangarh fort is?

The primary material used in the construction of this Jodhpur Kila is sandstone

So far, I have shared the intriguing stories of the Mehrangarh fort. Let me tell you one of the many Mehrangarh fort facts related to its size. The magnanimous fort occupies 1200 acres of land. It is spread over 5 km and has walls that are 120 feet high. There are 7 big gates to the expansive courtyards and palaces of Mehrangarh fort. Check out the details of all this in this mega travel guide to Mehrangarh Fort .

4. How long did it take to construct the Mehrangarh fort? – an astonishing Mehrangarh fort fact?

The construction of this epic fort began in 1459 by Maharaja Rao Jodha. However, it continued throughout the span of all the subsequent rulers. And there were 29 of them. Each one of them added or modified to the fort. In short, the construction of Mehrangarh fort took over 500 years.

Mehrangarh fort facts - the construction of the fort spans 500 years

Given this time span, you will find that there is no single type of architecture within the fort. You will find shades of Marwar along with a touch of Mughal style. What is more is that when you visit the various palaces inside Mehrangarh fort like Moti Mahal, Phool Mahal, Takhat Niwas & Sheesh Mahal – you will find that their grandeur shines through in extremely different styles.

5. The land on which Mehrangarh fort stands has now been classified as a National geological monument

It isn’t just the fort that is historically significant. In fact, it is the land on which it is built that is even more precious. The Geological survey of India has classified as a National geological monument ( like the St. Mary’s island of Malpe ) , this land has been identified as the Jodhpur Malani igneous suite contact that dates back to the Precambrian age . It is an important feature of the Thar desert and the Aravalli range.

The land on which Mehrangarh fort has been built has been classified as National geological monument

Now called the Rao Jodha desert park , this area has numerous volcanic rocks and sandstone formations that are over 600 million years old . The entire park is around 72 hectares and one can also, see the native birds and reptiles when they visit the place.

Are these the tall columns the biggest ones on St Mary's island ?

Located off the coast of Malpe in Karnataka is yet another National Geological monument of India. The St. Mary’s island has columnar basalt rocks that date back to the age when Madagascar was attached to India.

6. Mehrangarh fort haunted tales – murders & deaths

These Mehrangarh fort stories are not so well known. In fact, you will find that most guides in Mehrangarh fort do not talk about them. There is the tale of Maharaja Rao Ganga who smoked opium and strayed onto a parapet – only to fall to his death in 1530s. Some even say that his own son – Maldeo pushed him over the ledge but then, there is no conclusive evidence of that.

Another chilling tale is that of Maharaja Ajit Singh in the 1720s who was murdered by his own son Abhai Singh. It is believed that the son was promised the throne of Mehrangarh by the Jaipur Maharaja and the Mughals – provided he managed to kill his father.

Mehrangarh fort haunted stories of deaths

There are a few other tales that I have come across but none of them are verified. One of them includes Maharaja Man Singh killing his prime minister and the other involves Maharaja Jaswant Singh throwing off his concubine from the window as he was startled by his father’s arrival. As I understand the same concubine served as a mistress to his father.

7. The story of mass self-immolation in Mehrangarh Fort

Handprints of the Queens who became Sati at the Loha gate

As you enter the Loha gate of Mehrangarh fort , you will see saffron handprints along its arches. These were made by women who performed the act of Sati (self-immolation) upon the death of Maharaja Ajit Singh (the same one who was murdered by his son). Of the 16 prints, five belong to the Queens and the rest to the concubines.

8. Epic location for epic movies

You might have already seen Mehrangarh fort- even if you have not visited Jodhpur. How?

You will find background in many of the scenes of Bandish Bandits - one of the many films shot at Mehrangarh fort

Well, many epic movies have been shot here. You might have seen it in the popular sequences of 2012 DC classic – The Dark Knight rises or maybe in some of the Bollywood movies like Shuddh Desi Romance or Hum Saath Saath hai . The most recent is the popular musical web drama series – Bandish Bandits .

9. Mehrangarh fort is a hub for cultural & folk art

The Rathores (rulers of Mehrangarh fort) were great patrons of art. These range from the miniature paintings that you will still see in the various galleries of the fort to dance and music that is still performed by local and international artists here. On a regular day, you will see the local artists by the gates, showcasing their skills. You will be able to see a puppeteer with his many dolls or a folk dancer balancing many pots as she matches the beats of her accompanying musicians.

Musicians near the Loha Pol of Jodhpur's Mehrangarh fort

There are two major festivals that are hosted at Mehrangarh fort to continue the tradition of encouraging music and art. The first takes place in October and is called the Jodhpur Rajasthan International Folk Festival while the 2nd known as the Sacred Spirit festival celebrates Sufi music in February.

In addition to that, during Dusshera, you will still find locals thronging the Chamunda Mataji temple – keeping alive the age-old traditions.

10. Why is the blue city of Jodhpur also, called the Sun city?

View of the Blue city from Mehrangarh Fort

First off, do you know why Jodhpur city is called the Blue city? I mean, it is obvious from the painted blue homes but why have they been painted so?

There were several explanations given –

  • The homes that are painted blue belonged to the Brahmin community in service of the Royal house of Jodhpur. In early times, this city was called Brahmapuri.
  • Some say it was to combat the blazing heat of the city
  • Yet another explanation was that the homes were getting attacked by termites and there was a belief that the blue color helped keep them away.

Irrespective of the reason, the name is totally justified by the view that you can witness from Mehrangarh fort. However, what is not so clear is why would it be called Sun City. Well, that is partly owing to the fort itself.

The Rathores were suryavanshis or worshippers of Sun. This is said to have imparted the name of Sun city to their capital Jodhpur. In fact, they actually had named their fort as Mihirgarh – Mihir meaning sun and garh refers to fort . However, the local dialect changed the name to Mehrangarh.

Ah well, those are some reasons aka stories that will lead you straight to Mehrangarh fort. In fact, to help you plan your visit, I have put together a complete guide to Mehrangarh fort . The post has a complete tour of attractions and includes all the useful tips that you will need to plan a visit here.

Mehrangarh fort on a hillock that overlooks the blue city of Jodhpur

Tempted to visit Mehrangarh fort Jodhpur? Don’t worry, I got you covered. Check out this ultimate guide to Mehrangarh fort with all the key attractions to see and tips to visit

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Mehrangarh fort story facts

Booking Resources

  • Makemytrip.com  is a good resource to book your flight tickets – both international as well as domestic. They have numerous offers going on that will help you get a good price.
  • Booking.com  has several Jodhpur hotels listed on their site. You could use  this link  to browse and book the same.
  • If you prefer  Agoda.com  as a platform to book your hotels in Jodhpur, then you can use  this link  to get to the site and pick one.
  • Viator.com  offers several tours in and around Jodhpur. You will even find a  guided tour of Mehrangarh fort and Jaswant Thada  fon the site. Use the link to discover more and book one for yourself.
  • Klook. c om  has various local tours and car bookings available that you can use to book your trip to Jodhpur .You can also, book  special walking tours ,  cooking classes  and other immersive experiences on their site.
  • For any of your travel needs or general shopping, consider using  Amazon  through  this link.

Ami

Popularly referred to as a Restless Ball of Energy. My Mom refuses to entertain my complaints about my equally restless daughter & assures my husband that I was born with a travel bug.

I am a Post-Graduate in Marketing by qualification and a travel blogger by passion. Besides travel, I enjoy photography and if you don’t find me at my desk, I would be out playing badminton or swimming or just running. I believe in planning for every long weekend through the year. And when I cannot travel physically, I travel virtually through this travel blog. My travel stories have also, got published on various websites and magazines including BBC Travel, Lonely Planet India and Jetwings. I have recently published my first book – When Places Come Alive – a collection of stories that are based on legends, landscapes, art and culture of a place which is available in both ebook and paperback format.

20 thoughts on “The Mehrangarh fort haunted story & facts – 10 reasons to visit this Jodhpur fort”

What a fascinating place to visit! I’ve never heard of this fort but the history is truly impressive. It’s impressive it took over 500 years to complete and the condition is still pretty good. I can imagine it makes a great venue for events. I was also interested by the blue houses in Jodphur and the reasons behind it. Whatever it is, it makes for a really vibrant and beautiful scene!

Thanks Lisa. The blue houses is the reason why Jodhpur is called the blue city. So much to see in this fort and so many stories that keep coming out. Hope you plan to visit.

Such a fascinating history and set of tales related to the Mehrangarh Fort. I can understand why these draw people to visit – even if stories of drought, murder and sacrifice were true. Truly amazing to see the final shape created after 500 years and so many additions. Certainly a distinct structure to look for in movies. We would be certain not to miss the view of the blue city of Jodhpur.

Thanks Linda. Frankly these facts are the reason why people love visiting Mehrangarh

Loved reading your post about Mehrangarh fort. Your stories and interesting facts really bring it alive. The tales of curses, human sacrifice, and murders are so engaging, as well as learning more about the scale of the fort, how it was built, and the geological relevance of the site itself. Would love to visit and to experience the local culture and folk art at the same time.

Glad you like it Kavita. Hope you can plan your visit soon. There is plenty I am sure that I have missed too.

I have visited Jodhpur and have been inside the Mehrangarh fort but I didn’t visited it properly. I was travelling with a group and everyone decided to do the zip line rather than visit the fort, so that’s what we did. However, from the lines, I noticed how big the fort it. No wonder it took 500 years to build. The architecture and the decorations are so intricate. You are right, nobody told us about the chilling stories of the murders that happened here. It was interesting to read about the saffron handprints at the entrance to the fort. I remember seeing them but our guide didn’t mention them or tell us their story.

Time to visit again Joanna. This time it might be a zipline plus the tour of the fort. 🙂

Why – who does not love to hear about the stories that made great places great. You sure made my imagination come alive with the tales of curses and human sacrifice behind the Mehrangahr fort. The photo of the Blue city is amazing – it reminds me of Greek islands and was surprised to know the possible reasons behind. All in all a great read.

Thank you so much Adele. Glad you enjoyed the read

Meherangarh Fort has been on my wishlist for a long time. Hope I’ll get to visit here sometime soon. Interesting to know about the curse & droughts here. 1200 acres of land?!!!! Oh my Goodness! Good to know that it also includes Rao Jodha desert park and its volcanic rocks! Mass self-immolation reminds me of Padmavat. It would be quite intriguing to see these hand-prints in person.

Self immolation was so common back then and every time I saw those prints, I kind of felt sad. There are some in almost every Rajasthan fort.

Going to the Mehrangarh Fort sounds interesting. I’m curious to learn the tales and information about this location because I adore history. It has such stunning architecture. The local musicians and dancers’ performances are something else I would like to see. Jodhpur’s famous blue-painted houses are really charming. These ten factors are more than enough to convince me to visit this place very soon!

Thanks Maria. Glad you are enticed to visit.

Mehrangarh fort looks amazing! And it has such and interesting and captivating story. I can’t believe that it took over 500 to built it, but that alone makes it even more special. It also looks so big that I think in order to properly see everything, a person would need a lot of time. Very cool that it was also featured in several movies.

Half a day is just not enough according to me. I feel you can visit it more than once and still keep finding new stories.

The Mehrangarh fort is truly mesmerizing with its rich blend of and Rajput and Mughal architecture and no wonder it took 500 years to build it.The gruesome tales of human sacrifice and self immolation are chilling and astonishing at the same. The aerial views of the Jodhpur city with houses painted in blue are awesome . It’s also wonderful that you get the explore the local art , music and puppet shows to get a glimpse of the culture of the city.

Thanks Puloma. This is one awesome place – filled with stories to visit.

Nothing about the haunted pleasure palace inside Mehrangarh Fort? I was expecting to read that at least….

I have only heard of the concubine who was thrown out of the window. I suppose there may be many other tales but none that I could verify or hear in entirety.

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7 Haunted Forts In India That Will Send Chills Down Your Spine

by middha on August 25, 2018

India has seen many dynasties rule over it and there are many forts and military structures left behind from these dynasties that are proof of their past splendour.

Forts have always been a symbol of might. However, not all forts weave stories of heroism and stoicism. Many of these forts have a spooky past that tell gruesome or eerie tales. We’ve picks out the most haunted forts in India for those seeking out the supernatural.

The Most Haunted Forts In India

1. bhangarh fort.

Bhangarh Fort

Bhangarh Fort | Haunted Forts In India

Bhangarh fort tops the charts in our list of the haunted forts in India. The fort was built for Princess Ratnavati of Alwar. Legend has it that a Tantrik worshipper by the name of Singhia fell madly in love with the princess and tried to use the dark arts to charm her.

The princess, however, saw through this and ordered him dead. In his last breath, he cursed the princess and the entire court. The haunting of this fort is well known. The Archaeological Society of India has set up warnings that no one be permitted on the premises after sunset.

  • Location: Gola Ka Baas, Rajgarh Tehsil, Alwar, Bhangarh

Suggested to Read : Top 10 breathtaking palaces and forts of India that you should not miss

2. Shaniwarwada Fort

Shaniwarwada Fort

Shaniwarwada Fort | Haunted Forts In India (source)

Shaniwarwada has always been home to the Maratha Peshwas and their followers. The fort was built in 1732 in honour of Peshwa Bajirao has come to represent a gruesome betrayal. Narayan Rao, who was 18 at the time, was the fifth ruling Peshwa in Pune.

On the order of his uncle Raghunathrao and aunt Anandibai, Narayan Rao was mauled by his guards. It is said that till this day his screams for help can be heard in the fort. In the early 1800s, the fort caught on fire and burned for a week. The spirits those people who died in this fire are also said to haunt the fort.

  • Location: Shaniwar Peth, Pune

Suggested to Read : Top 5 Forts In Bikaner That You Must Absolutely Visit

3. Feroz Shah Kotla

The remnants of the Feroz Shah Kotla

The remnants of the Feroz Shah Kotla | Haunted Forts In India (source)

Right beside the Jami Masjid lies the ruins of Feroz Shah Kotla. The place is well known among the locals as being the resting grounds of Jinns. Jinns are said to be malevolent spirits, cast out of heaven and cursed to eternally roam the earth.

Jinns are said to prey on unguarded young women and children at night. These spirits are said to have no shape and are invisible to the naked eye. To appease them, the grounds are left with offerings such as milk, grains and fruits.

  • Location: Jawaharlal Nehru Marg, Raj Ghat, New Delhi

4. Nahargarh Fort

Nahargarh Fort

Nahargarh Fort | Haunted Forts In India

Nahargarh Fort stands at the foothills of the Aravali Mountain Range that overlooks the city of Jaipur. The Maharaja Sawai Raja Man Singh wanted no one to lay eyes on his queens and hence ordered the walls of the fort to be built extremely high.

Even the grandeur of the palace cannot keep out the eerie atmosphere that the fort casts. It is said that even after his death, the king would come back to the fort and it is his spirit that haunts its corridors. At a time when the fort was undergoing a renovation, a person was found dead inside under mysterious circumstances.

  • Location: Krishna Nagar, Brahmpuri, Jaipur

Suggested to Read : A Detailed and Comprehensive List of 15 Forts near Jaipur City

5. Golconda Fort

Golconda Fort

Golconda Fort | Haunted Forts In India

Golconda Fort was ruled over for the longest time by the Kakatiyas Dynasty. The fort was constructed in the 13th century but has seen various renovations under the whims and fancies of its many rulers. It is said that the King’s paramour haunts the fort. Her spirit has been seen dancing on what once used to be her stage. There are also reports of other paranormal activities – shooting crews have heard strange voices and lighting going haywire while at this fort.

  • Location: Khair Complex, Ibrahim Bagh, Hyderabad

Suggested to Read : 8 Forts Near Hyderabad for the Historical Touch

6. Uparkot Fort

Uparkot Fort | Haunted Forts In India

Uparkot Fort | Haunted Forts In India

This beautiful fort is located on a plateau right in the middle of Junagadh City and sees a massive number of tourists every year. The fort is known for its various attractions such as the Hanuman Temple, Buddhist Caves, and Baba Pyara Caves.

The fort houses the Jama Masjid which is said to be built over an ancient Hindu temple. The area that surrounds the masjid is said to be haunted. In fact, the locals are so scared that they don’t dare to visit this area after the sun sets.

  • Location: East Junagadh, Gujarat

7. Mehrangarh Fort

Mehrangarh Fort, Jodhpur | Haunted Forts In India

Mehrangarh Fort, Jodhpur | Haunted Forts In India

Mehrangarh Fort is as intriguing as it is beautiful. The foundation of the fort was laid by Rao Jodha in 1459. In the process of it being built, a hermit who resided on the hilltop was displaced.

To please the hermit, Rao Jodha had a young man by the name of Rajiya Bambi set ablaze – his soul was sacrificed. After this, a series of misfortunes followed Rao and his family and the fort is haunted with these ill feelings.

  • Location: The Fort, Jodhpur

Suggested to Read : 16 Important Forts to Visit in Delhi and Around

Beware, these are some of the scariest places in India. If you have an interest in paranormal activities and the stomach for it, these places can thrill and excite with their eerie auras. Have you ever had an otherworldly experience in an old fort in India? Let us know in the comments section.

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आज भी क्यों माना जाता है भानगढ़ किला हर किसी के लिए भूतिया, केवल शाम 6 बजे तक खुली रहती है ये जगह

भानगढ़ किले को भूतिया बताने के पीछे कई कहानियां हैं। वैज्ञानिकों ने इन भूतिया कहानियों को खारिज कर दिया है, लेकिन यहां के लोगों का कहना है कि यहां अजीब-अजीब सी घटनाएं होती रहती हैं।.

mystery of bhangarh fort

भानगढ़ से जुड़ी भूतिया कहानी

भानगढ़ से जुड़ी भूतिया कहानी

अधिकांश लोगों का मानना है कि भानगढ़ किला भूतिया है और इसके अनेकों किस्से की वजह से लाखों लोग यहां घूमने की इच्छा रखते हैं। सूर्यास्त के बाद किले में प्रवेश करना बहादुरी और बेवकूफी का काम है, क्योंकि इसे पैरानॉर्मल एक्टिविटी का केंद्र माना जाता है। यही वजह है कि आर्केलॉजिकल सर्वे ऑफ़ इंडिया ने रात को यहां जाना बैन किया है।

स्थानीय लोगों की मनपसंद कहानी है लोकप्रिय सम्राट माधो सिंह की , जिन्होंने गुरु बालू नाथ की स्वीकृति प्राप्त करने के बाद शहर का निर्माण किया था, वे एक तपस्वी थे जिन्हें ध्यान में रहना बेहद पसंद था। संत ने अपनी स्वीकृति इस शर्त पर दी कि महल की छाया उनके प्रार्थना स्थल पर नहीं पड़नी चाहिए। अगर ऐसा हुआ तो महल तहस-नहस हो जाएगा।

जब महल का निर्माण पूरा हुआ, तो उसकी छाया संत के प्रार्थना स्थल पर पड़ गई और भानगढ़ उसी समय तहस नहस हो गया। संत के क्रोध को झेलने के बाद, भानगढ़ तुरंत एक शापित शहर में बदल गया और इसे फिर से नहीं बसाया जा सका, क्योंकि इसमें कोई भी संरचना कभी भी जीवित रहने में कामयाब नहीं हुई। हैरानी की बात तो यह है कि बालूनाथ का तपस्या स्थल अभी भी खंडहर अवस्था में देखा जा सकता है।

विचित्र किंतु सत्यः जानें किले में मौजूद आत्मा का सच

(फोटो साभार: इंडियाटाइम्स)

भानगढ़ का किला: भारत की सबसे डरावनी जगह

भानगढ़ का किला: भारत की सबसे डरावनी जगह

वैज्ञानिक भानगढ़ की कहानियों को खारिज करते हैं, लेकिन गांव के लोग अभी भी इस किले को भूतिया मानते हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि उन्होंने एक औरत के चिल्लाने, चूड़ियां तोड़ने और रोने की आवाजें सुनी हैं। साथ ही उनका कहना है कि किले से संगीत की आवाजें भी आती हैं और कभी-कभी उन्हें परछाइयां भी दिखाई देती हैं।

कुछ लोगों को लगता है कि कोई उनका पीछा कर रहा है और उन्हें पीछे से थप्पड़ मार रहा है। वहां से अजीब सी गंध भी आती है, ऐसा स्थानीय निवासियों का कहना है। इन्हीं कारणों की वजह से सूर्यास्त के बाद दरवाजे बंद हो जाते हैं और किले में एंट्री बिलकुल बैन हो जाती है। हालांकि यह कहानियां मनगढ़ंत हैं या असल, इस बारे में तो कोई कुछ भी नहीं कह सकता।

भानगढ़ फोर्ट कैसे पहुंचें?

भानगढ़ फोर्ट कैसे पहुंचें?

सड़क मार्ग से: भानगढ़ फोर्ट, जिसे भानगढ़ का किला भी कहा जाता है, दिल्ली से लगभग 300 किलोमीटर दूर है। अच्छा होगा अगर आप सुबह-सुबह निकलें और सूर्यास्त से पहले किला घूम लें, क्योंकि सूर्यास्त के बाद वहां घूमना मना है। इसके अलावा आप खुद की गाडी से या रेंट पर लेकर भानगढ़ किला घूमने के साथ-साथ नीमराना, जयपुर, सरिस्का, अलवर भी घूम सकते हैं।

ट्रेन यात्रा : वैकल्पिक रूप से, आप नई दिल्ली से अलवर के लिए शताब्दी एक्सप्रेस ले सकते हैं और फिर भानगढ़ किले के लिए टैक्सी का इंतजाम कर सकते हैं। हालांकि, ट्रेन के लिए पहले से बुकिंग करानी होगी। याद रखें कि भानगढ़ के आसपास कोई होटल या रेस्ट्रॉन्ट नहीं है। वैसे आपको रास्ते में ढाबे की सुविधा मिल जाएगी, लेकिन ट्रिप के लिए घर से खाना पैक कराकर निकलें तो अच्छा होगा। हालांकि रास्ते में ढाबे मिलना इतना भी मुश्किल नहीं है।

भानगढ़ किले का समय

भानगढ़ किले का समय

सुबह 6 से शाम 6 बजे तक

(फोटो साभार: wikimedia commons)

भानगढ़ जाने का सबसे अच्छा समय

भानगढ़ जाने का सबसे अच्छा समय

अक्टूबर से फरवरी के बीच भानगढ़ जाना अच्छा होगा क्योंकि इस समय मौसम थोड़ा ठंडा रहता है।

सपना सिंह

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Hindi Yatra

भानगढ़ फोर्ट की कहानी | Bhangarh Fort Story in Hindi

Bhangarh Fort Story in Hindi : राजस्थान के अलवर जिले में भानगढ़ नाम के गांव में एक किला है जिसे भानगढ़ का किला कहा जाता है. आज से करीब 500 साल पहले जब 1573 में आमेर के भगवंत दास ने अपने पुत्र माधोसिंह के लिए भानगढ़ का यह किला बनवाया था और Bhangarh नामक इस शहर को बसाया था. इस दुर्ग का नाम भान सिंह के नाम पर है जो माधो सिंह के पिता थे.

भानगढ़ का किला तीन तरफ से पहाड़ियों से घिरा हुआ है. इस किले की भूतिया कहानियों का खौफ इतना है कि सरकारी निर्देशानुसार सूर्यास्त के बाद इस किले में किसी भी व्यक्ति के जाने पर मनाही है. इस किले को भारत के भूतिया स्थानों में पहला स्थान प्राप्त है (India first haunted Place Bhangarh Fort).

Bhangarh Fort Story in Hindi

भानगढ़ के किले के बारे में इतनी कहानियां है कि इसे हमें भूतों का गढ़ कहा जाने लगा है, लोग अंधेरे में तो क्या यहां पर उजाले में आने से भी डरते हैं. एक खौफनाक खंडहर में सदियों का इतिहास झटपटा रहा है और घुटन की चारदीवारी में एक अनमोल विरासतका दम घुट रहा है.

कहते हैं करीब 300 साल पहले एक श्राप की वजह से पूरा भानगढ़ तबाह हो गया. यह कहानी कितनी सच्ची है इसका अभी तक कोई प्रमाण नहीं मिला है लेकिन सुनने में यह बहुत ही दिलचस्प है.

Bhangarh Fort Story in Hindi

भानगढ़ तबाह क्यों हुआ इसके पीछे की कहानी –

भानगढ़ की तबाह होने के पीछे सदियों से चली आ रही है एक कहानियाँ है.  भानगढ़ के किले से एक दो नहीं सैकड़ों किस्से और कहानियां जुड़ी हुई है लेकिन इन कहानियो के सच का अभी तक कोई प्रमाण नहीं मिला है

राजकुमारी रत्नावती की खूबसूरती के कारण भानगढ़ के तबाह होने की कहानी

भानगढ़ किले में वहां की एक बेहद खूबसूरत राजकुमारी रहती थी जिसका नाम रत्नावती था. रत्नावती आसपास के राज्य में सबसे खूबसूरत महिला के रूप में जानी जाती थी. उसकी खूबसूरती की चर्चा हर जगह हो रही थी इसके कारण हर कोई उन्हें देखना चाहता था. उनकी उम्र लगभग 18 वर्ष की थी तब उनके लिए विभिन्न राज्यों से राजकुमारों के रिश्ते आने लगे थे. रत्नावती के विवाह की बातें चल रही थी.

एक दिन राजकुमारी रत्नावती अपनी सहेलियों के साथ Bhangarh के बाजार में घूमने के लिए निकली थी. वह पूरे बाजार में घूम रही थी कभी कपड़ों की दुकान पर तो कभी चूड़ियों की दुकान पर और आख़िर में वह एक इत्र की दुकान पर पहुंची. राजकुमारी को इधर बहुत पसंद था इसलिए वह तरह तरह के इत्र देख रही थी. वह उनकी खुशबू भी खुली हुई थी. लेकिन थोड़ी ही दूर पर एक व्यक्ति उनकी खूबसूरती मैं खोया हुआ था.

उस व्यक्ति का नाम सिंधिया सेवड़ा था. वह राजकुमारी को एकटक निगाहों से देखे ही जा रहा था मानव उसने किसी अप्सरा को देख लिया हो. उसे पहली नजर में राजकुमारी रत्नावती से बहुत प्यार हो गया था. वह उस समय का बहुत बड़ा तांत्रिक भी कहा जाता है जो कि अपने काले जादू से किसी को भी अपने वश में कर सकता था.

जब राजकुमारी ने इत्र खरीद लिया और दुकान वाले से कहा कि यह इधर उनके महल में भिजवा दिया जाए. इतना कहकर वह महल की तरफ जाने लगी लेकिन इसी बीच वह तांत्रिक भी खड़ा था. लेकिन राजकुमारी ने उसकी तरफ ध्यान भी नहीं दिया था. इसलिए तांत्रिक बहुत ही गुस्सा हो गया था.

तांत्रिक सिंधिया सेवड़ा ने राजकुमारी रत्नावती का प्यार पाने के लिए एक योजना बनाई. उसने इत्र की दुकान पर जाकर उत्तर की बोतल पर काला जादू कर दिया जिसको राजकुमारी रत्नावती नहीं खरीदा था. एक तरह का वशीकरण मंत्र उस बोतल पर कर दिया था जिससे जो भी उस बोतल के इत्र को लगाता वह उस तांत्रिक के पीछे पीछे चला आता था.

राजकुमारी रत्नावती को इस बात का पता चल गया था तो उन्होंने उस इत्र की बोतल को एक चट्टान के ऊपर दे मारा जिससे पूरा इत्र उस चट्टान के ऊपर लग गया. और वह चट्टान लुढ़कते हुए तांत्रिक के ऊपर जा गिरी जिससे उसकी मृत्यु हो गई. लेकिन तांत्रिक ने मरते-मरते पूरे भानगढ़ को श्राप दे दिया कि कुछ ही दिनों में पूरा भानगढ़ तबाह हो जाएगा यहां के सभी लोग मर जाएंगे.

तांत्रिक की इस बात में कितना सच था यह तो किसी को नहीं पता था लेकिन कुछ ही महीनों वादे भानगढ़ और अजबगढ़ राज्य में युद्ध हो गया था. जिसके कारण वहां के सभी व्यक्ति मारे गए और इसमें राजकुमारी रत्नावती की भी मृत्यु हो गई.

और पूरा भानगढ़ सुनसान हो गया था इसीलिए लोग कहते हैं कि वहां पर मारे गए लोगों की आत्माएं अभी भटकती हैं. इसीलिए भानगढ़ किले को भुतहा किला भी कहा जाने लगा है.

लेकिन इस बात का कोई प्रमाण नहीं है कि ऐसी कोई कहानी हुई थी या फिर ऐसा कोई युद्ध भी हुआ था.

ऋषि मुनि के श्राप से भानगढ़ के तबाह होने की कहानी

जिस जगह पर आज Bhangarh Kila स्थित है वहाँ से कुछ ही दुरी पर एक ऋषि की कुटिया थी. किले का निर्माण करने से पूर्व राजा भगवंत दास इस किले के निर्माण की जगह कौन देखने आए थे. तब उन्हें वहां एक महान ऋषि की कुटिया दिखाई दी. उस ऋषि का नाम ऋषि बालू नाथ.

राजा भगवंत दास ने अपने किले के निर्माण की योजना को उन ऋषि को बताया. तब ऋषि बालू नाथ ने कहा कि आप यहां पर किले का निर्माण तो करवा सकते हैं लेकिन उस किले की ऊंचाई इतनी नहीं होनी चाहिए कि उस किले की परछाई मेरी कुटिया पर पड़े. नहीं तो पूरा किला तहस-नहस हो जाएगा.

लेकिन राजा भगवंत दास ने इस बात को इतनी तवज्जो नहीं दी और महल का निर्माण करवाने लगी किला करीब 7 मंजिल ऊंचा बनाया गया था. जिसके बाद उस किले की परछाई ऋषि बालू नाथ की कुटिया पर पड़ गई. फिर क्या था कुछ दिनों में पूरा किला टूटकर तहस-नहस हो गया और वहां पर कोई नहीं बचा.

भानगढ़ किले के भूतिया होने के पीछे तीसरी कहानी –

भानगढ़ को लेकर एक मान्यता और है वह यह है कि सदियों पहले जब यह शहर बर्बाद हुआ था तब इसी मलबे में यहां का सारा खजाना दफन हो गया था. इसको उस वक्त कहीं और ले जाया जाना संभव नहीं था इसलिए उस खजाने से दुनिया को दूर रखने के लिए भूतों का भ्रम फैलाया गया है.

भानगढ़ किले के बारे में रोचक बातें-

1. कहा जाता है कि भानगढ़ किले के गलियारों में इंसानी आवाजें सुनाई देती हैं. 2. दिल के मंदिर में किसी अदृश्य शक्ति का वास है. 3. नृतकियों की हवेली से घुंघरू की आवाज आती हैं. 4. राजा के तहखाने में प्रवेश करने वाला परलोक सिधार जाता है. 5. दरबार में राजा आज भी फैसले सुनाता है. 6. और गांव के कुए पर लोग पानी भरने आते हैं. 7. इस किले में सूर्यास्त के बाद प्रवेश करने की मनाही है. 9. कहा जाता है कि इसके लिए मैं जो भी रात को रुकता है वह या तो मृत पाया जाता है या फिर पागल हो जाता है.

Disclaimer : हिंदी यात्रा किसी प्रकार के अंधविश्वास का समर्थन नहीं करती है. यह देखो लोगों द्वारा बताई गई बातों और कहानियों पर आधारित है. इन कहानियों का कोई ऐतिहासिक प्रमाण नहीं है.

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दोस्तों भानगढ़ किले की तबाही की कहानियां आपको कैसी लगी और अच्छी लगी हो तो अपने दोस्तों के साथ शेयर करना ना भूलें अगर आपका कोई सवाल या सुझाव हो तो हमें कमेंट करके बताएं

17 thoughts on “भानगढ़ फोर्ट की कहानी | Bhangarh Fort Story in Hindi”

this is very interesting place to see. i will definitely to see this place at least once … i hope i see all the voices and and all the creativity behind the bhangarh fort …

Welcome to india

I’m Ankit from New Delhi… I was visiting the Bhangarh Kila 19-10-19.

Meri dili khawish thi. Ki Mein ise kile ko deku or jau. Or Rani Ratnawati ki story I liked it. Ye Kila na Jaane Kitni salo se mujhe Mano bula raha ho. Or aaj Jake ek Alag sa sakun mila.

Ise kile mein entre karte Waqut Jaise hi Hanuman Ji ka mandir cross kiya.. Or kile ke andar gaya Mano ek ajeeb se ghutan hui or specially kile ke andar ek ajeeb sa mahol mahhusus Hua….. Or oxgiyan level toa bahaut Kam sa laga.

But jab kile ke andar Gaye toa Jaise pada or wo diware dekhi toa laga. Haan aisaa hi kuch Hua hoga Jaise aap ne story mein likha tha…… I liked the javeri Bazar…… Maan aaj bhi wahan mandi Lagata Hai… Thoda sa government ko yanha ki khubsoorati or dharohar ko Shambhala ke rakh a chaiye.

Please contact me any information about this Kila…

Ankit New Delhi Email : [email protected]

Ankit ji hame accha laga aap bhangarh gye or apna experience bataya dhanyawad

hi im so happy to see u bhangarh fort because i also want to see but unfortunatly never gone there. if u have possible give me more information about bhangarh fort. thanks

Is kile me khajana bhi h ye sch h ya jhoot ye to nhi pta pr is me bhoot jarur h ye me manta hu pr is kile ki Jo sachayi h bo sch h or me is kile ko dekhne ek bar jarur jaunga

Vishnu singh ji kile ko jaruru dekhiye aacha kila hai Dhanyawad.

Story bhut aachi lgi sach me kuch to h tbhi to atna femas h bangad ke logo ne kuch to dekha hoga tbhi bolte h

Dhanyawad Kamal kumar, aise hi website par aate rahe.

Muje andr Jana he kile ke

Puran gadri aap kisi bhi din fort me ja sakte hai

very intresting place….i will definitely come here..!!

Mhuje es per vishwas nahi hai

Ishwar patel sab logo ki soch par nirbhar karta hai, aap ko vishwas nahi hai yah acchi baat hai.

Ha vakai ye kila bhutiya hai eska raj khulna chaiye

Mujhe ish kile ke andar Jana he

RamLakhan baghel ji Aap ja sakte hai yeh dekhne layak stahan hai.

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mehrangarh fort haunted in hindi

Dec 16, 2020

by Press Release

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New modification of Russian VVER-440 fuel loaded at Paks NPP in Hungary

DECEMBER 14, 2020 — After the recent refueling at power unit 3 of the Hungarian Paks NPP, its VVER-440 reactor has been loaded with a batch of fresh fuel including 18 fuel bundles of the new modification. The new fuel will be introduced at all four operating power units of the Paks NPP, and the amount of new-modification bundles in each refueling will be increased gradually.

Development of the new VVER-440 fuel modification was completed in 2020 under the contract between TVEL JSC and MVM Paks NPP Ltd. Its introduction would optimize the hydro-uranium ratio in the reactor core, enabling to increase the efficiency of fuel usage and advance the economic performance of the power plant operation. All VVER-440 fuel modifications are manufactured at the Elemash Machine-Building Plant, a facility of TVEL Fuel Company in Elektrostal, Moscow Region.

Paks Nuclear Power Plant

“Introduction of a new fuel is an option to improve technical and economic performance of a nuclear power plant without substantial investment. We are actively engaged in development of new models and modifications of VVER-440 fuel for power plants in Europe. The projects of the new fuels for Loviisa NPP in Finland, Dukovany NPP in the Czech Republic, Mochovce and Bohunice NPPs in Slovakia, are currently at various stages of implementation. Despite the same reactor model, these projects are quite different technically and conceptually, since we take into account the individual needs and requirements of our customers,” commented Natalia Nikipelova, President of TVEL JSC.

For reference:

The project of development and validation of the new fuel has been accomplished with participation of a number of Russian nuclear industry enterprises, such as OKB Gidropress (a part of Rosatom machine-building division Atomenergomash), Bochvar Institute (material science research facility of TVEL Fuel Company), Elemash Machine-building plant and Kurchatov Institute national research center. At the site of OKB Gidropress research and experiment facility, the new fuel passed a range of hydraulic, longevity and vibration tests.

Paks NPP is the only functioning nuclear power plant in Hungary with total installed capacity 2000 MWe. It operates four similar units powered by VVER-440 reactors and commissioned one by one in 1982-1987. Currently, Paks NPP is the only VVER-440 plant in the world operating in extended 15-monthes fuel cycle. The power plant produces about 15 bln kWh annually, about a half of electric power generation in Hungary. In 2018, the project of increasing the duration of Paks NPP fuel cycle won the European competition Quality Innovation Award in the nomination “Innovations of large enterprises”. Russian engineers from TVEL JSC, Kurchatov Institute, OKB Gidropress, Bochvar Institute and Elemash Machine-building plant provided assistance to the Hungarian colleagues in accomplishment of the project.

  TVEL Fuel Company of Rosatom incorporates enterprises for the fabrication of nuclear fuel, conversion and enrichment of uranium, production of gas centrifuges, as well as research and design organizations. It is the only supplier of nuclear fuel for Russian nuclear power plants. TVEL Fuel Company of Rosatom provides nuclear fuel for 73 power reactors in 13 countries worldwide, research reactors in eight countries, as well as transport reactors of the Russian nuclear fleet. Every sixth power reactor in the world operates on fuel manufactured by TVEL.  www.tvel.ru  

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Norilsk: The city built by gulag prisoners where Russia guards its Arctic secrets

Environmental activists are frustrated by how authorities handled a diesel spill which poured into two Arctic rivers in late May.

mehrangarh fort haunted in hindi

Moscow correspondent @DiMagnaySky

Friday 3 July 2020 23:41, UK

Please use Chrome browser for a more accessible video player

Arctic suffers worst ever industrial spill

The drive from Norilsk airport to the city takes you past mile after mile of crumbling, Soviet-era factories.

It looks like an endless, rusting scrapyard - a jumble of pipes, industrial junk and frost-bitten brickwork. If you were looking for an industrial apocalypse film setting, this would be your place - but you're unlikely to get the permissions.

Norilsk was built in Stalin's times by gulag prisoners. This gritty industrial city is a testament to their endurance both of the cruelty of Stalin's regime and of the harsh polar climate. There were no thoughts then on how to build to protect the environment, just to survive it.

Norilsk in Russia. Pic: Anastasya Leonova

Vasily Ryabinin doesn't think much has changed, at least in ecological terms. He used to work for the local branch of the federal environmental watchdog, Rosprirodnadzor, but quit in June after exposing what he says was a failure to investigate properly the environmental impact of the gigantic diesel spill which poured into two Arctic rivers in late May.

At 21,000 tonnes, it was the largest industrial spill in the polar Arctic .

Despite the Kremlin declaring a federal emergency and sending a host of different agencies to participate in the clean-up, just last week Mr Ryabinin and activists from Greenpeace Russia found another area where technical water used in industrial processes was being pumped directly into the tundra from a nearby tailing pond. Russia's investigative committee has promised to investigate.

"The ecological situation here is so bad," Mr Ryabinin says.

"The latest constructions such as the tailing pond at the Talnack ore-processing plant were built exclusively by Nornickel chief executive Vladimir Potanin's team and supposedly in accordance with ecological standards, but on satellite images you can see that all the lakes in the vicinity have unnatural colours and obviously something has got into them."

Nornickel Plant and container (on the left) which had the leak. Pic: Anastasya Leonova

Mining company Nornickel would disagree. It has admitted flagrant violations at the tailing pond and suspended staff it deems responsible at both the Talnack plant and at Norilsk Heat and Power plant no 3 where the diesel spill originated from.

On Thursday it appointed Andrey Bougrov, from its senior management board, to the newly-created role of senior vice president for environmental protection. It has a clear environmental strategy, provides regular updates on the status of the spill, and its Twitter feed is filled with climate-related alerts.

But what investors read is very different to the picture on the ground.

21,000 tonnes of diesel oil has spilled into two rivers in Norilsk

Norilsk used to be a closed city - one of dozens across the Soviet Union shut off to protect industrial secrets. Foreigners need special permissions approved by the Federal Security Service (FSB) to enter the region. It would take an invitation from Nornickel to make that happen and, for the past month since the spill, that has not been forthcoming.

Unlike in Soviet times, Russian citizens are now free to come and go. That's why our Sky News Moscow team were able to fly in and travel around the city, even if getting to the spill site was blocked. What they were able to film provides a snapshot of the immense challenge Russia faces in upgrading its Soviet-era industrial infrastructure, particularly at a time when climate change is melting the permafrost on which much of it was built.

The Russian city of Norilsk. Pic: Anastasya Leonova

Just downwind from one of the rusting factories on the city outskirts is a huge expanse of dead land. The skeletal remains of trees stand forlorn against the howling Arctic winds. Sulphur dioxide poisoning has snuffed the life out of all that lived here. Norilsk is the world's worst emitter of sulphur dioxide by a substantial margin.

"For 80km south of here everything is dead," Mr Ryabinin says, "and for at least 10km in that direction too. Everything here depends on the wind."

Sample took by Vasily Ryabinin near the Nornickel plant in Norilsk, Russia, on the day of an accident. Pic: Vasily Ryabinin

Immediately after the spill, Mr Ryabinin filmed and took samples from the Daldykan river just a few kilometres from the fuel tank which had leaked. By that point the river was a churning mix of diesel and red sludge dredged up from the riverbed by the force of the leak. Norilsk's rivers have turned red before and the chemical residues have sunk to the bottom, killing all life there. Nothing has lived in those rivers for decades.

In his capacity as deputy head of the local environmental watchdog, Mr Ryabinin says he insisted that he be allowed to fly further north to check the levels of contamination in Lake Pyasino and beyond.

Nornickel at the time claimed the lake was untouched by the spill. Mr Ryabinin says his boss encouraged him to let things be.

"I can't be sure I would have found anything, but this sort of confrontation - making sure I didn't go there with a camera, let alone with bottles for taking samples, it was all very clear to me. It was the final straw."

Rosprirodnadzor refused to comment to Sky News on Mr Ryabinin's allegations or suggestions that the agency was working hand in hand with Nornickel.

The Nornickel plant and the place where diesel meets red water (polluted by other chemicals). Pic: Vasily Ryabinin

Georgy Kavanosyan is an environmental blogger with a healthy 37,000 following on YouTube. Shortly after the spill, he set out for Lake Pyasino and to the Pyasina River beyond to see how far the diesel had spread.

"We set out at night so that the Norilsk Nickel security wouldn't detect us. I say at night, but they've got polar nights there now, north of the Arctic Circle. So it's still light but it's quieter and we managed to go past all the cordons."

He is one of the few to have provided evidence that the diesel has in fact travelled far beyond where the company admits. Not just the 1,200km (745m) length of Lake Pyasino but into the river beyond.

He says his measurements indicated a volume of hydrocarbons dissolved in the water of between two and three times normal levels. He thinks after he published his findings on YouTube, the authorities' vigilance increased.

Greenpeace Russia have spent the last two weeks trying to obtain samples from Lake Pyasino and the surrounding area. They have faced difficulties getting around and flying their samples out for independent analysis.

They are now waiting for results from a laboratory in St Petersburg but say the samples remain valid technically for just four days after collection and that they weren't able to make that deadline due to the authorities' actively obstructing their work.

Vasily Ryabinin and Elena Sakirko from Greenpeace. Pic: Anastasya Leonova

Elena Sakirko from Greenpeace Russia specialises in oil spills and says this has happened to her before. This time, a police helicopter flew to the hunter's hut where they were staying and confiscated the fuel for the boat they were using. Then a deputy for the Moscow city parliament tasked with bringing the samples back from Norilsk was forced to go back empty-handed.

"We were told at the airport we needed permission from the security department of Nornickel," Ms Sakirko says. "We asked them to show us some law or statement to prove that this was legal or what the basis for this was, but they haven't showed us anything and we still don't understand it."

Nornickel announced this week that the critical stage of the diesel spill is over. The company is now finalising dates for a press tour for foreign media and for other international environmentalists.

Mr Ryabinin thinks this should have happened weeks ago.

"If we don't let scientists come to the Arctic region to evaluate the impact of the accident, then in the future if anything similar happens, we won't know what to do."

A spokesperson for Nornickel said the company "is actively cooperating with the scientific community and will meticulously assess both the causes and effects of the accident."

The Russian city of Norilsk. Pic: Anastasya Leonova

Nornickel considers permafrost thawing to be the primary cause of the accident, but is waiting for the end of investigation before making a final statement, the spokesperson said.

They added that the company "accepts full responsibility for the incidents on its sites these past two months and holds itself accountable for any infrastructural deficits or poor decisions by personnel.

"The imperative is to do everything to clean up our sites, instil a stronger culture of transparency and safety in our workforce, and ensure that such situations do not occur in the future."

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    Migrants scalped a young guy. The incident occurred because a guy with green hair asked migrants for a cigarette, who did not like his appearance. 19-year-old Yury Markov was thrown to the ground, beaten and cut off part of the skin from his head along with his hair. Currently, one of the participants in the execution has been detained; he ...

  21. Machine-Building Plant (Elemash)

    In 1954, Elemash began to produce fuel assemblies, including for the first nuclear power plant in the world, located in Obninsk. In 1959, the facility produced the fuel for the Soviet Union's first icebreaker. Its fuel assembly production became serial in 1965 and automated in 1982. 1. Today, Elemash is one of the largest TVEL nuclear fuel ...

  22. New modification of Russian VVER-440 fuel loaded at Paks NPP in Hungary

    Paks NPP is the only functioning nuclear power plant in Hungary with total installed capacity 2000 MWe. It operates four similar units powered by VVER-440 reactors and commissioned one by one in ...

  23. Norilsk: The city built by gulag prisoners where Russia guards its

    Norilsk was built in Stalin's times by gulag prisoners. This gritty industrial city is a testament to their endurance both of the cruelty of Stalin's regime and of the harsh polar climate.